
Bagheli culture will be preserve in APSU, poet conference held in Rewa
रीवा। बघेली बोली, साहित्य व कवितों को संरक्षित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में बघेली प्रकोष्ठ स्थापित किया गया है। जल्द प्रकोष्ठ की ओर से तैयार किए जा रहे वाचनालय में संबंधित रचनाएं उपलब्ध होगी। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित कवि सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित कुलपति प्रो. केएन सिंह ने उक्त विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बघेली बोली के उन्नयन के लिए प्रयास किए जाएंगे।
साहित्यकारों ने प्रकोष्ठ के गठन पर व्यक्त किया हर्ष
विश्वविद्यालय के पं. शंभूनाथ शुक्ल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि मप्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन जिला इकाई के अध्यक्ष डॉ. चंद्रिका प्रसाद चंद्र ने प्रकोष्ठ के गठन पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि इसे बघेली पीठ का रूप दिया जाना चाहिए। मौके पर उन्होंने मशहूर कवि गोपालदास नीरज की कविताओं का भी उल्लेख किया। कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. दिनेश कुशवाह के संयोजन में आयोजित कवि सम्मेलन का संचालन शिवाशंकर त्रिपाठी शिवाला ने किया।
कवियों व गीतकारों ने प्रस्तुत की अपनी रचनाएं
कविताओं पर आधारित कार्यक्रम की शुरुआत कवि राम नरेश तिवारी निष्ठुर ने विंध्यगीत के साथ किया। इसके बाद कवि डॉ. रामसिया शर्मा ने ‘मन हय बहुत उदास..., कालिका प्रसाद त्रिपाठी ने सकिलत जाइ घरे के अंगना..., देवेंद्र पाण्डेय बेघडक़ ने कहा से चले थे..., डॉ. अमोल मिश्र बटरोही ने भूत उतरि गा... जैसी रचनाओं के जरिए कार्यक्रम की शमां बांधा।
इन कवियों ने भी सम्मेलन में बांधा शमां
इसके अलावा गीतकार गिरिजा शंकर गिरीश, बाबूलाल दाहिया, सूर्यभान कुशवाहा, दर्शन राही, शिवाशंकर शिवाला, भृगुनाथ भ्रमर, सूर्यमणि शुक्ल, सुधाकांत बेलाला, डॉ. रामसरोज सहित अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्राध्यापक व कर्मचारी सहित छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में यह लोग भी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में कवि कैलाश तिवारी, रामलखन सिंह महगना, रामलखन जलेश सहित अन्य कवियों के अलावा हिन्दी विभाग के प्रो. बारेलाल जैन, डॉ. चंद्रप्रकाश पटेल, प्रो. एनपी पाठक, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बुद्धसेन पटेल, कृष्णेंद्र मिश्रा, प्रो. दयाशंकर सिंह बघेल सहित अन्य छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं।
Published on:
22 Jul 2018 12:38 pm
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