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Bina news: डूयूटी के दौरान गेट मेन को हुआ सीने और हाथ में दर्द, सिविल अस्पताल रेफर, डॉक्टर ने किया मृत घोषित

जेपी थर्मल पावर प्लांट बीना की कंपनी में कार्यरत था कर्मचारी, आश्वासन के बाद छह घंटे बाद परिजनों ने कराया पीएम, कंपनी ने तत्काल एक लाख रुपए का चेक
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सागर

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sachendra tiwari

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Updated: 7 Sep 2026, 12:29 PM IST

Gatekeeper experiences chest and arm pain while on duty.

मर्चुरी के बाहर मांगों को लेकर चर्चा करते हुए। फोटो-पत्रिका

बीना. जेपी थर्मल पावर प्लांट में मेसर्स बच्चा सिंह कंपनी में गेट मेन के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी की तबीयत बिगडऩे के बाद मौत हो गई। परिजनों ने कंपनी पर सूचना न देने सहित इलाज न कराने के आरोप लगाते हुए सुबह पीएम नहीं कराया। इसके बाद कंपनी ने मृतक की पत्नी को एक लाख रुपए का चेक देकर अन्य मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया तब छह घंटे बाद पीएम हुआ।
जानकारी के अनुसार कमल सिंह पिता शालकराम पवार (51) निवासी सिरचौंपी मेसर्स बच्चा कंपनी में गेट के पद पर कार्यरत थे। शनिवार वह नाइट ड्यूटी कर रहे थे और सुबह करीब 4 बजे अचानक सीने में, हाथ में दर्द हुआ और जेपी की अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद सिविल अस्पताल भेजा गया था, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद सुबह 8 बजे डॉक्टर शव का पीएम करने पहुंचे थे, लेकिन परिजनों और पूर्व जनपद अध्यक्ष इंदर सिंह ने पहले सहायता राशि, बेटे को नौकरी और पत्नी को पेंशन देने की मांग रखते हुए पीएम कराने से मना कर दिया था। मृतक के बेटे राजदीप ने बताया कि उन्हें 4.30 बजे कंपनी से फोन आया था कि पिता की तबीयत खराब है और अस्पताल भेज दिया है। सिविल अस्पताल पहुंचने पर पता चला की उनकी मौत हो चुकी है। अस्पताल ले जाने के पहले कंपनी ने सूचना नहीं दी थी। साथ ही जेपी अस्पताल में इलाज न किए जाने का भी आरोप लगाया।

एक लाख का दिया चेक


पीएम न होने की सूचना मिलने पर तहसीलदार डॉ. अंबर पंथी ने जेपी प्रबंधन के अधिकारियों से फोन पर चर्चा की। तहसीलदार ने तत्काल राहत राशि देने के लिए कहा था और फिर कंपनी से एक लाख रुपए का चेक दिया गया। साथ ही बीमा की राशि भी दी जाएगी। इसके बाद करीब छह घंटे बाद दोपहर 2 बजे पीएम हुआ।

हार्ट अटैक से हुई मौत


पीएम करने वाले डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि कर्मचारी की मौत हार्ट अटैक से हुई है। जेपी अस्पताल के डॉक्टर से भी बात की गई थी और उन्होंने बताया कि कर्मचारी को पेट में जलन, सीने और हाथ में दर्द था। कर्मचारी का उपचार भी किया गया था, लेकिन थोड़ी देर बाद दर्द ज्यादा बढऩे पर रेफर किया गया था।

इलाज के बाद किया था रेफर


कर्मचारी का इलाज जेपी अस्पताल में किया गया था, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार न होने पर सिविल अस्पताल रेफर किया गया था। कंपनी से एक लाख रुपए का चेक मृतक की पत्नी को दिलाया गया है। साथ ही बीमा के बीस लाख रुपए और पीएफ की राशि भी दी जाएगी। कर्मचारी की जान बचाने के लिए पहले इलाज उपलब्ध कराना जरूरी था, इसलिए परिजनों को सूचना नहीं दी गई थी।
प्रवीण कुमार, एचआर एडवाइजर, जेपी प्रबंधन