
मिट्टी की प्रतिमा तैयार करते हुए। फोटो-पत्रिका
बीना. पर्यावरण संरक्षण के लिए मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं को बढ़ावा देने की बात लगातार की जाती है, लेकिन बढ़ती महंगाई और निर्माण में लगने वाली अधिक मेहनत के कारण मिट्टी की प्रतिमाएं अब लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगी हैं। दूसरी ओर पीओपी से बनी प्रतिमाएं सस्ती होने के कारण लोग इन्हें खरीदने लगे हैं। अधिकारी पीओपी की प्रतिमाओं पर रोक लगाने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
मिट्टी की प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार धर्मेन्द्र सकवार पिछले करीब 40 वर्षों से इस काम से जुड़े हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मिट्टी, रंग सहित प्रतिमा निर्माण में उपयोग होने वाली लगभग सभी सामग्री के दाम बढ़ गए हैं। इसके साथ ही मिट्टी की प्रतिमा बनाने में मेहनत भी अधिक लगती है। इसका सीधा असर प्रतिमाओं की लागत पर पड़ा है। जागरूक लोग मिट्टी की ही प्रतिमा को प्राथमिक दे रहे हैं।
धर्मेन्द्र सकवार ने बताया कि पांच वर्ष पहले पांच फीट की मिट्टी की गणेश प्रतिमा करीब 21 हजार में तैयार हो जाती थी, जो अब करीब 31 हजार रुपए हो गई है। इसके बावजूद वह मिट्टी की प्रतिमा ही तैयार करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि भगवान की प्रतिमा ऐसी होनी चाहिए, जिसका विसर्जन पर्यावरण के लिए नुकसानदायक न हो। साथ ही पूजन भी मिट्टी की प्रतिमा की करनी चाहिए।
मिट्टी की प्रतिमा तैयार करना आसान काम नहीं है, इसके लिए सबसे पहले अच्छी मिट्टी की जरूरत होती है, जिसके कंकड़ और कचरा निकालने अच्छे से छनाई की जाती है। मिट्टी में मिलाने के लिए शुद्ध रुई, गोंद, कागज की जरूरत होती। साथ ही खडिय़ा मिट्टी, धान के डंठल, लकड़ी, सुतली और जूट की पट्टी का उपयोग होता है। अंतिम रूप देने के लिए महंगे रंग लगते हैं।
मिट्टी की प्रतिमाओं की लागत बढऩे से बाजार में पीओपी की सस्ती प्रतिमाएं लोगों को आकर्षित कर रही हैं। कम समय और कम लागत में तैयार होने के कारण पीओपी की प्रतिमाएं बड़ी संख्या में बनाई जा रही हैं, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक। इसके केमिकल से जल और जलीय जीवों को नुकसान होता है।
धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण की दृष्टि से भी मिट्टी की प्रतिमा अधिक उपयुक्त है। मिट्टी की प्रतिमा प्राकृतिक सामग्री से बनती है, विसर्जन के बाद मिट्टी पानी में मिल जाती है। वहीं, पीओपी की प्रतिमा आसानी से नहीं घुलती और जलस्रोतों में अवशेष छोड़ देती है। पीओपी की प्रतिमाओं में इस्तेमाल होने वाले रंग और अन्य केमिकल भी पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।
Updated on:
11 Sept 2026 12:09 pm
Published on:
11 Sept 2026 12:08 pm
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