2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यूपी के सहारनपुर में एक ऐसा पेड़ जिस पर लगते हैं 121 तरह के आम, देखकर रह जाएंगे हैरान

यूपी के सहारनपुर में है आम का यह पेड़ पांच साल पहले वैज्ञानिकों ने किया था शोध

2 min read
Google source verification
mangio.jpg

mango

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
सहारनपुर ( Saharanpur) जरा सोचिए आम के एक पेड़ ( mango trees ) पर कितने प्रकार के आम लग सकते हैं ? आपका जवाब यही होगा कि एक पेड़ पर एक ही तरह के आम लगेंगे लेकिन आज हम आपको एक ऐसे पेड़ के बारे में बताने जा रहे हैं जिस पर 121 तरह के अलग-अलग आम लग रहे हैं।

यह भी पढ़ें: यूपी में महज 190 नए कोरोनावायरस केस, इन चार में हो रहा है जीनोम सिक्वेंसिंग जांच

यह पेड़ सहारनपुर के कंपनी बाग में स्थित है। आज से करीब पांच वर्ष पहले इस पेड़ पर कृषि वैज्ञानिकों ने एक प्रैक्टिकल किया था। उस प्रैक्टिकल में आम ( Mango ) के इस पेड़ की अलग-अलग शाखाओं पर 121 तरह की प्रजातियों की कलम यानी ब्रांच लगाई गई थी। वैज्ञानिकों का यह परीक्षण सफल हुआ और इस पेड़ पर इन कलम से अलग अलग तरह की शाखाएं निकलने लगी। बाद में इन सभी पर फल आने लगे। अब इस आम के एक पेड़ ही अलग-अलग तरह के आम आते हैं।

यह भी पढ़ें: सीएम योगी का छोटे जिलों को तोहफा, 11 जिलों में बीएसएल-2 लैब शुरू अब कोरोना जांच होगी तेज

सहारनपुर औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के तत्कालीन संयुक्त निदेशक राजेंद्र कुमार प्रसाद ने यह प्रयोग किया था। इस प्रयोग के बाद से ही इस आम के पेड़ पर 121 तरह के अलग-अलग प्रजातियों के आम लगते आ रहे हैं। औद्योगिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र सहारनपुर के उपनिदेशक जयकरण सिंह ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इस बार भी इस आम के एक ही पेड़ पर दशहरी, लंगड़ा, चौसा, रामकेला, आम्रपाली, सहारनपुर अरूण, सहारनपुर वरुण, सहारनपुर सौरभ, सहारनपुर गौरव, सहारनपुर राजीव, लखनऊ सफेदा, टॉमी एटकिंग्स, पूसा, सूर्या, सेंसेशन, रटोल, कलमी, मालदा, मुंबई स्मिथ, मैंगी फेरा, जालोनिया, गोला, बुलंदशहर, लरनकू, एलआर स्पेशल, आलमपुर बेनिसा, असोजिया और देवबंद समेत करीब 121 प्रजातियों के आम लगे हुए हैं। अब इस आम के वृक्ष को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में शामिल कराए जाने की पहल की जा रही है।


करीब 10 वर्ष पुराना है पेड़
जिस पेड़ पांच वर्ष पहले यह शोध किया गया था उसकी उम्र करीब 10 वर्ष है। इस पेड़ की शाखाओं पर अलग-अलग कलमें उगाई गई थी और अब इन्हीं कलमों की वजह से एक ही पेड़ अलग-अलग तरह के फल दे रहा है।

यह भी पढ़ें: Corona Third Wave : बच्चों की सुरक्षा के लिए यूपी की एम्बुलेंस सेवाएं मुस्तैद, अत्याधुनिक सुविधाओं से हैं लैस

यह भी पढ़ें: अयोध्या जमीन खरीद मामला : बीजेपी के मेयर व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय सहित 9 के खिलाफ संजय सिंह ने दी तहरीर, कहा- नहीं दर्ज हुई FIR तो जाएंगे कोर्ट