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पत्रिका एक्सक्लूसिव: भीम आर्मी नेता के भाई की मौत का मामला, देखिए लगने के बाद सचिन के कहां फंसी थी गोली

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सहारनपुर

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Rahul Chauhan

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Updated: 11 May 2018, 6:52 PM IST

Sachin walia

सहारनपुर। भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष कमल वालिया के छोटे भाई संजय वालिया के पोस्टमार्टम को डॉक्टरों के पैनल ने किया। एक्सपर्ट ऑफ पैनल की रिपोर्ट के मुताबिक गोली होंठ के ऊपरी हिस्से से शरीर में घुसी और फिर मुंह के रास्ते होते हुए वह गर्दन में जा फंसी। प्रथम दृष्टया पंचनामे के दौरान यही माना जा रहा था कि गोली लगने के बाद बाहर निकल गई है लेकिन जब सचिन केशव का एक्सरे कराया गया तो बेहद चौका देने वाला तथ्य सामने आया और गोली हॉट के ऊपर से अंदर घुसी और यह गोली संजीव वालिया की गर्दन में फंसी हुई थी।

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चैनल ऑफ एक्सपर्ट की राय के मुताबिक गोली लगने के बाद खून बहने और हेम्ब्रेज शौक से मौत हुई है। हम आपको एक्स-रे की वह तस्वीर दिखा रहे हैं जिसमें गोली साफ दिखाई दे रही है आप देख सकते हैं गर्दन के नीचे जो पॉइंट गोली के आकार का आपको दिखाई दे रहा है वही खोली है और गर्दन में फंसी हुई है इस अक्षर के आधार पर ही चैनल ऑफ एक्सपर्ट ने पोस्टमार्टम के दौरान इस गोली को संजय वालिया के शरीर से बाहर निकाला।

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तो देसी तमंचे से हुआ था फायर
भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष कमल वालिया के भाई संजय वालिया के शरीर से जो गोली निकली है वह 315 बोर की है। यह बोर सामान्यतः देशी तमंचों के लिए ही इस्तेमाल होता है। 315 बोर की गोली थ्री नॉट थ्री राइफल की गोली की तरह होती है। 315 बोर की गोली को राइफल में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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जब यह गोली राइफल में चलती है तो इसकी मारक क्षमता बेहद अधिक होती है और अगर राइफल से यह गोली चली होती तो गर्दन को चीरकर बाहर निकल जाती। यानी शरीर में एंट्री वुण्ड के साथ-साथ एग्जिट वुण्ड भी होता लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक संजय के शरीर में हॉट के ऊपर नाक के बराबर में एंट्री वुण्ड तो है लेकिन इसकी बॉडी में कोई एग्जिट वुण्ड नहीं है। एग्जिट ना होने का एक कारण यह भी है कि गोली अंदर ही फंसी रह गई थी।

वीडियोग्राफी के साथ हुआ पोस्टमार्टम
मृतक संजय के परिजन पोस्टमार्टम के लिए राजी नहीं हो रहे थे दोपहर को हुई इस घटना के बाद शाम हो गई शाम के बाद रात हो गई लेकिन परिजनों ने साफ कह दिया कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी तब तक वह पोस्टमार्टम नहीं होने देंगे प्रशासन ने और पुलिस ने कई बार परिवार के लोगों से बात की और उन्हें समझाया कि जब तक पोस्टमार्टम नहीं होगा तब तक मुकदमे की जांच आगे नहीं बढ़ सकती और ऐसे में गिरफ्तारी नहीं हो सकती लेकिन यह लोग नहीं माने और अपनी बात पर अड़े रहे इसके बाद तड़के करीब 4:00 बजे मृतक के परिजनों को यह बात समझ आ गई और वह पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी हो गए। जिलाधिकारी PK पांडे के मुताबिक रात में ही पोस्टमार्टम के लिए पैनल ऑफ एक्सपर्ट यानि डॉक्टरों का समूह चयनित किया गया और 3 डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के साथ संजय के बॉडी का पोस्टमार्टम किया।