10 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

देवबंदी आलिम ने कहा— गर्भवती महिलाएं न रखें रोजा

Highlights देवबंदी आलिम ने दी गर्भवती महिलाओं को सलाह कहा— रमजान माह के बाद अदा कर सकती हैं अपने रोजे बोले— शरीयत में इस बात की इजाजत दी गई है

less than 1 minute read
Google source verification
vlcsnap-2020-05-02-11h43m41s985.png

देवबद। इस समय रमजान चल रहे हैं। डॉक्टर गर्भवती महिलाओं भूखा नहीं रहने की सलाह देते हैं। ऐसे में देवबंदी आलिम ने कहा है की मुस्लिम गर्भवती महिलाएं रोजे न रखें। गर्भवती महिलाएं रमजान माह के बाद अपने रोजे अदा कर सकती हैं।

यह भी पढ़ें: कर्मवीर: तीनों भाई—बहन फर्ज निभाने के साथ ही अस्पताल में करते हैं सहरी, दुआओं में मांगते हैं वैक्सीन

यह कहा देवबंदी आलिम ने

देवबंदी आलिम मुफ्ती अहमद ने कहा कि जो औरत गर्भवती है, उसके ऊपर एक जिम्मेदारी है। उसके साथ—साथ अल्लाह की अमानत उसके गर्भ मे पल रही है। उसके ऊपर रोजा फर्ज नहीं है। उसके पास ऐसा जरिया नहीं है कि उसे खाना पहुंचाया जा सके। उसकी मां अगर खाए—पिएगी तो उस बच्चे को भी ताकत मिलेगी। अल्लाह ने इस मजबूरी को सामने रखते हुए शरीयत मे इस बात की इजाजत दी है कि अगर कोई औरत गर्भवती है और वह कमजोर है। खाना खाने व पानी पीने की जरूरत है और वह यह महसूस कर रही है कि गर्भ में पल रहा उसका बच्चा भूखा है तो वह रोजे न रखें।

यह भी पढ़ें: इस्तीफे का ऐलान कर चुकी महिला आईएएस ने घर आने के लिए मांगा पास

मुसलमान के लिए रोजा है जरूरी

उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाएं रमजान के बाद आम दिनों मे अपना रोजा अदा कर सकती हैं। यह उनके लिए कुर्बानी है। एक मुसलमान के लिए रोजा एक बहुत बड़ा जज्बा है। मुसलमान के लिए रोजा बहुत जरूरी होता है। लेकिन जहां एक मासूम की जान बचाने का मशला है, वहां गर्भवती महिला रोजा छोड़ सकती है।