
सहारनपुर/देवबंद. राष्ट्रीय सेवा संघ की ओर से तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओ को पांच सौ रुपए हर माह पेंशन दिये जाने के मसले पर मौलाना अब्दुल लतीफ कासमी ने कहा कि किसी की हमदर्दी जतलाने पर उसे कबूल करना चाहिए, लेकिन मैं आरएसएस वालों से एक सवाल पूछना चाहता हूं कि यह हमर्दी सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के लिए ही क्यों है, जबकि इस तरह की महिलाओ की तादाद तो ज्यादा मुस्लिमों से ज्यादा गैर मुस्लिमों की है। ज़्यादा पीड़ित भी वही महिलाऐं हैं। तलाकशुदा मुस्लिम महिला कहीं भी सड़कों पर नहीं हैं। वह कहीं भीख नहीं मांगती हैं, क्योंकि इस्लाम में ऐसी औरतों के लिए एक व्यवस्था की गयी है। बेवाओ और तलाकशुदा महिलाओ के लिए हमारे यहां एक फंड होता है, जिसे ज़कात कहते हैं। उस फंड से मुसलमान ऐसी महिलाओ की मदद करते हैं। कोई भी पर्दानशी महिला आपको परेशान नज़र नहीं आयेंगी, जो परेशान नज़र आती है और सड़को पर हैं। और जो भीख मांगती फिर रही हैं, जो बेचारी दर ब दर की ठोकरें खा रही हैं। उनके लिए आरएसएस ने ये पेन्शन क्यों नहीं शुरू की है। आरएसएस मेरे इस सवाल का जवाब दें।
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दरअसल, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की इकाई मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के लिए 500 रुपये मासिक पेंशन योजना शुरू की गई है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय संयोजिका रेशमा हुसैन ने गुरुवार को इस गैर सरकारी पेंशन योजना की शुरुआत की। गौरतलब है कि संघ के प्रचारक इंद्रेश कुमार के जन्मदिन पर इस योजना की शुरुआत की गई है। नियम के मुताबिक तलाकशुदा और विधवा महिलाएं इस गैर सरकारी पेंशन का लाभ ले सकती हैं।
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इस योजना के पहले दिन 10 तलाकशुदा और विधवा महिलाओं को सालाना पेंशन की पहली किश्त वितरित की गई। इस मौके पर हुसैन ने बताया कि मंच की ओर से प्रत्येक महिला को इस पेंशन के रूप में सालाना 6000 रुपए की राहत मिलेगी। उन्हें बताया कि आगे चलकर प्रत्येक दो महीने में पेशन की किश्त दी जाएगी। उन्होंने बताया तलाकशुदा और विधवा महिलाएं इस गैर सरकारी पेंशन का लाभ लेने के लिए मुस्लिम राष्ट्रीय के दफ्तर और व्यक्तिगत रूप से उनसे संपर्क कर सकती हैं।
Published on:
20 Feb 2018 05:56 pm
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