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Saharanpur News: सहारनपुर मस्जिद मामले में हाईकोर्ट का बड़ा दखल, यूपी सरकार से मांगा जवाब, जुर्माने की वसूली पर रोक

Saharanpur Mosque Demolition Case: सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 6.41 करोड़ रुपये के जुर्माने की वसूली पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। यूपी सरकार से जवाब मांगा है।
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Saharanpur Mosque Demolition Case

सहारनपुर में अवैध मस्जिद पर कार्रवाई की गई थी (Photo: Screengrab x@SyedSho43211335)

Saharanpur Mosque Demolition Case:सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मस्जिद प्रबंधन की ओर से दाखिल याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है। साथ ही अगली सुनवाई तक मस्जिद कमेटी से छह करोड़ रुपये से अधिक के जुर्माने की वसूली पर रोक लगा दी है।मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत में हुई। राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तारीख तय की है।

6.41 करोड़ रुपये के जुर्माने की वसूली पर रोक

इस मामले में सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को कलक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को अवैध घोषित किया था। इसी आदेश में मस्जिद प्रबंधन पर 6.41 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया गया था। मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में न केवल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को चुनौती दी है, बल्कि उस प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं, जिसके आधार पर प्रशासन ने कार्रवाई की थी। हाईकोर्ट ने फिलहाल अगली सुनवाई तक इस जुर्माने की वसूली पर रोक लगा दी है।

मस्जिद कमेटी ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

मस्जिद प्रबंधन की ओर से मुतवल्ली तनवीर अहमद ने याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को प्रशासन ने बिना नोटिस और सक्षम आदेश के ध्वस्त कर दिया। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि कार्रवाई के दौरान संबंधित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। मस्जिद कमेटी ने वर्शिप एक्ट के प्रावधानों का हवाला देते हुए भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाया है। इसके अलावा बिजली का बिल स्वीकार नहीं करने, सभी गवाहों की पूरी गवाही दर्ज नहीं कराने और फाइल को बहस के लिए लगाकर अंतिम निर्णय किए जाने जैसे प्रक्रिया संबंधी बिंदुओं को भी याचिका में चुनौती दी गई है।

पीपी एक्ट को लेकर भी दलील

मस्जिद कमेटी ने पब्लिक प्रिमाइसेज (एविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्यूपेंट्स) एक्ट यानी पीपी एक्ट के तहत हुई कार्रवाई पर भी सवाल उठाया है। याचिका में कहा गया है कि इस कानून के तहत कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को अपना स्वामित्व साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। कमेटी का आरोप है कि सरकार और प्रशासन की ओर से इस संबंध में पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किए गए। प्रबंधन ने कोर्ट से मामले में तय कानूनी प्रक्रिया और संबंधित प्रावधानों का पालन किए जाने की मांग की है।

जिला अदालत के बाद हाईकोर्ट पहुंचा मामला

मस्जिद प्रबंधन की अपील जिला जज की अदालत में भी खारिज हो चुकी है। इसके बाद मुतवल्ली की ओर से आठ सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई थी। शुक्रवार को यह मामला कोर्ट की कॉज लिस्ट में 35वें नंबर पर था और कोर्ट नंबर-9 में इसकी सुनवाई हुई। सुनवाई को लेकर प्रशासन और पुलिस भी सतर्क रहे। अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी, जब राज्य सरकार की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किया जाना है।

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