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रेलवे प्रोजेक्ट के विलंब पर केंद्र ने जताई आपत्ति, राज्य से मांगा सहयोग

सतना-पन्ना न्यू लाइन और सतना-रीवा दोहरीकरण पर भी विलंब का सायाभू-अर्जन और फॉरेस्ट क्लियरेंस के कारण लंबित हैं मामले

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Center expresses objection to delays of railway projects

Center expresses objection to delays of railway projects

सतना. केंद्र सरकार लंबित रेलवे प्रोजेक्ट को काफी संजीदगी से ले रही है। पीएमओ का मानना है कि प्रोजेक्ट के विलंब के कारण न केवल उसकी लागत बढ़ती है बल्कि कार्यप्रणाली में भी सवाल उठता है। इस पर प्रधानमंत्री ने अपनी प्रगति समीक्षा में संबंधित विभागों को तेजी लाने के निर्देश दिए थे। रेलवे ने राज्यवार समीक्षा की तो पाया कि मध्यप्रदेश में रेलवे के कई प्रोजेक्टर भू-अर्जन, फॉरेस्ट क्लियरेंस समय पर न मिलने के कारण कई नई परियोजनाएं लेटलतीफी का शिकार हो रही हैं। इस पर केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर परियोजनाओं के अवरोध दूर करने का अनुरोध किया। अब मुख्य सचिव को इन मामलों की समीक्षा कर अवरोध दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें पाया गया कि सतना जिले की दो रेलवे परियोजनाएं राजस्व और वन विभाग की अनदेखी के कारण विलंबित हैं। मुख्य सचिव ने मामले में कलेक्टर को स्वयं देखने के निर्देश दिए हैं। वे स्वयं मामले की समीक्षा 16 जुलाई को करेंगे।
जानकारी के अनुसार, पश्चिम मध्य रेलवे (डब्लूसीआर) अंतर्गत आने वाली ललितपुर-सतना-रीवा-सिंगरौली नई रेलवे लाइन प्रोजेक्ट भी विभागीय अनदेखी के चलते विलंब के दायरे में है। सतना जिले के हिस्से में इस लाइन का सतना पन्ना सेक्शन आता है। इसमें रेलवे ने बताया कि सेक्शन में 389 हैक्टेयर निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसका प्रपोजल जिला प्रशासन को दिया जा चुका है। इसके तहत 421 भू-स्वामियों का जमीन अधिग्रहण विवादों में फंसा हुआ है। बताया गया कि इनके द्वारा कम मुआवजे का हवाला देकर जमीन देने में आनाकानी की जा रही है। इसी तरह से 99 हैक्टेयर जमीन वन भूमि है। इसमें भी अभी विवाद की स्थिति बनी हुई है।

सतना-रीवा रेल लाइन दोहरीकरण

इसी तरह का विवाद रेलवे के अनुसार सतना-रीवा रेल लाइन दोहरीकरण के नए प्रोजेक्ट पर भी है। इस प्रोजेक्ट के लिए भू-अर्जन का प्रस्ताव जिला प्रशासन को 6 अगस्त को सौंपा जा चुका है। लेकिन इसमें भी लेटलतीफी हो रही है।
सतना जिले में हो रहा बड़ा खेल
इधर, रेल लाइन भू-अर्जन में बड़े खेल भी सामने आ चुके हैं। रेलवे अधिकारियों और राजस्व अमले की मिलीभगत से अधिग्रहीत होने वाली जमीनों की धारा प्रकाशन के बाद भी खरीद बिक्री हो रही है। इस कारण से विवाद की स्थिति बन रही है। मसलन हाल ही में रामपुर बाघेलान तहसील के ग्राम बगहाई में एक जमीन के कई हिस्सों की धारा प्रकाशन के बाद बिक्री कर दी गई और इनके मामले नामांतरण के लिए भी भेज दिए गए। मामला उजागर होने के बाद भी आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई दोषियों पर नहीं की गई।

कलेक्टर ने नागौद में ली बैठक

इधर, रेलवे प्रोजेक्ट में आ रहे विलंब को देखते हुए हाल ही में कलेक्टर सतेन्द्र सिंह ने नागौद में रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक कर भू-अर्जन विवाद को लेकर बैठक ली थी। इसमें पाया गया कि कुछ मामलों में रेलवे के अधिकारी जानबूझ कर छोटे-छोटे मामलों में विवाद की बात कह रहे हैं तो जो मामले वास्तविक रूप से विवादित पाए गए उसमें एसडीएम को तत्काल मामलों का निराकरण के निर्देश दिए गए हैं।