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satna: कलेक्टर चैम्बर के ऊपर बैठ कर लाखों का वारा न्यारा कर रहे थे अधिकारी

अभिलेखों के परीक्षण में लाखो की अनियमितता आई सामने आयुक्त ने जारी किया शो-कॉज

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satna: कलेक्टर चैम्बर के ऊपर बैठ कर लाखों का वारा न्यारा कर रहे थे अधिकारी

satna: The officers were committing fraud of lakhs in the collectorate

सतना. संयुक्त कलेक्ट्रेट में कलेक्टर चेंबर के ऊपर स्थित है जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग का दफ्तर। फरवरी 2019 से जून 2020 तक यह दफ्तर भ्रष्टाचार का केन्द्र बना रहा। इसका खुलासा इस दफ्तर में संधारित की गई नस्तियों और अभिलेखों के परीक्षण के बाद सामने आया है। जांच में व्यापक पैमाने पर गड़बड़झाला पकड़ में आया है जिसके दोषी तत्कालीन जिला संयोजक कमलेश्वर सिंह प्रभारी जिला संयोजक माने गये हैं।मिली जानकारी के अनुसार आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग जिसे सामान्य भाषा में आदिम जाति कल्याण विभाग भी कहा जाता है में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। पाया गया है कि तत्कालीन प्रभारी जिला संयोजक ने नियमानुसार कार्यालयीन लेखा एवं अभिलेखों का कोषालय के माध्यम से परीक्षण नहीं कराया। इनकी अनियमितताओं की वजह से निर्माण कार्य पूरे नहीं हो सके।

लाखों का छात्रवृत्ति घोटाला

अनुसूचित जाति व जनजाति के विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक योजना के तहत बड़ा छात्रवृत्ति घोटाला किया गया है। शासन ने 2016 में स्पष्ट आदेश जारी किये थे कि निजी कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को शासकीय संस्थाओं के समान छात्रवृत्ति दी जाएगी। लेकिन निजी कॉलेजों को लाभ पहुंचाने के लिये इन्होंने 2019-20 में 432 छात्रों को 21.92 लाख रुपये दे दिये। इसी तरह 2020-21 में 315 छात्रो को 36.25 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। जो शासकीय कालेजों में दी जाने वाली फीस से काफी ज्यादा था। इसे बड़ा घोटाला माना गया है।

बिना कलेक्टर के अनुमोदन के किया आहरण

पाया गया है कि तत्कालीन जिला संयोजक ने 2018-19 व 2019-20 में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का अनियमित आहरण बिना सक्षम अधिकारी (कलेक्टर) के अनुमोदन के किया और नियम विरुद्ध भुगतान किया।

टेण्डर का किया खेल

अनुसूचित जाति मद के तहत सामग्री प्रतिपूर्ति से संबंधित 46.25 लाख रुपये का अनियमित व्यय किया गया। शासन से निर्धारित फर्मों से क्रम न करते हुए जेम के माध्यम से सामग्री क्रय की गई। जबकि जेम के माध्यम से 5 लाख रुपये तक के क्रय का प्रावधान है। इससे अधिक की सामग्री क्रय किये जाने के लिये खुली निविदा का प्रावधान है। अंकेक्षण में ऐसा करना नहीं पाया गया।

फर्मों को पहुंचाया लाभ

नियमानुसार क्रय सामग्री के भुगतान में टीडीएस कटौत्रा का प्रावधान है। लेकिन 9.08 लाख और 35.75 लाख रुपये की सामग्री क्रय किये जाने के बाद फर्मों को भुगतान की गई राशि में टीडीएस की कटौती नहीं की गई।

आवास सहायता योजना में गड़बड़झाला

तत्कालीन जिला संयोजक ने अनुसूचित जाति आवास सहायता योजना की राशि में भी व्यापक अनियिमितता की है। मंत्रालय के निर्देशानुसार आवास सहायता राशि स्वीकृति के अधिकारी जिला अधिकारी को दिये गये हैं। लेकिन इन्होंने यह राशि बिना जिला कलेक्टर की अभिस्वीकृति प्राप्त किये स्वत: आहरण आदेश जारी कर दिये। इसमें भी राशि का आहरण वित्तीय नियमों के विपरीत पाया गया है।

सरकारी वाहन होते हुए निजी वाहन

पाया गया है कि विभाग का शासकीय वाहन एमपी 02एबी 1371 की अपलेखन की कार्यवाही किये बिना किराये का वाहन उपयोग किया गया और इस पर डीजल के नाम पर एक लाख रुपये से ज्यादा का अपव्यय किया गया।

जारी किया शो-कॉज

बताया गया है कि कलेक्टर केबिन के ऊपर स्थित इस जिला संयोजक कार्यालय में लाखो रुपये की अनियमितता पाये जाने पर आयुक्त जनजातीय कार्य ने तत्कालीन जिला संयोजक कमलेश्वर सिंह को शो-कॉज जारी किया है।