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राजस्थान में शैक्षणिक संस्थानों द्वारा की जा रही कथित कर चोरी और व्यावसायिक अनियमितताओं के खिलाफ वाणिज्यिक कर विभाग ने एक बड़ी और संगठित कार्रवाई को अंजाम दिया है। गंगापुर सिटी के नसियां कॉलोनी इलाके में संचालित दो प्रतिष्ठित और बड़े निजी शिक्षण संस्थानों पर राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) की एंटी-इवेजन विंग ने एक साथ सर्वे और छापे की कार्रवाई की। वाणिज्यिक कर विभाग के मुख्य आयुक्त के इनपुट और निर्देशों पर हुई इस संयुक्त कार्रवाई के बाद से ही पूरे क्षेत्र के निजी स्कूल संचालकों और कोचिंग माफियाओं के बीच हड़कंप का माहौल बना हुआ है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि ये संस्थान नियमित स्कूली शिक्षा प्रदान करने की सरकारी मान्यता का गलत फायदा उठाकर करोड़ों रुपए का कमर्शियल कोचिंग बिजनेस चला रहे थे और सरकार को मिलने वाले टैक्स को पूरी तरह से चूना लगा रहे थे। सूत्रों के अनुसार इन दो संस्थानों से करीब 5 करोड़ रुपए की कर चोरी पकड़ी गई है।
जीएसटी (GST) नियमों के अनुसार, भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों द्वारा दी जाने वाली नियमित स्कूली शिक्षा (कक्षा 1 से 12वीं तक) को पूरी तरह से करमुक्त (Tax-Free) यानी सेवा कर के दायरे से बाहर रखा गया है ताकि आम जनता पर पढ़ाई का बोझ न पड़े। लेकिन इसके विपरीत, किसी भी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं, जैसे IIT, NEET, JEE, या सिविल सर्विसेज के लिए अलग से संचालित की जाने वाली कोचिंग सेवाओं पर सामान्यतः 18% की दर से जीएसटी (GST) वसूलना और उसे सरकारी खजाने में जमा कराना पूरी तरह अनिवार्य होता है।
गंगापुर सिटी के इन दोनों चिन्हित संस्थानों ने इसी कानूनी बारीकी का नाजायज फायदा उठाया। उन्होंने अपनी नियमित स्कूल की आड़ ली और छात्रों का दाखिला स्कूल में दिखाया, लेकिन वास्तव में वे उन बच्चों को लाखों रुपए की अतिरिक्त फीस वसूलकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवा रहे थे। इस पूरी फीस राशि को स्कूल के खाते या करमुक्त शिक्षा के रूप में दर्शाया जा रहा था, जिससे सरकार को सीधे तौर पर करोड़ों रुपए के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
वाणिज्यिक कर विभाग के प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ये दोनों प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान पिछले 6-7 वर्षों से लगातार इसी प्रकार की अनैतिक कार्यप्रणाली के जरिए अपनी समानांतर व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे थे। इन संस्थानों में पढ़ने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से प्रतियोगी परीक्षाओं की महंगी कोचिंग के बदले में लाखों रुपए की भारी-भरकम शुल्क राशि केवल नकद के रूप में ली जा रही थी।
नकद लेनदेन करने का मुख्य उद्देश्य इस पूरी कमाई को मुख्य बैंकिंग और लेखा रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब रखना था, ताकि विभागीय ऑडिट के दौरान इस कर चोरी को पकड़ा न जा सके। अभिभावक भी बच्चों के भविष्य और अच्छे परीक्षा परिणामों के चक्कर में बिना किसी पक्के बिल या रसीद के यह नकद राशि इन संस्थानों के काउंटरों पर जमा करवा रहे थे, जिससे इन संचालकों की अघोषित आय लगातार बढ़ती जा रही थी।
वाणिज्यिक कर विभाग की इस औचक कार्रवाई के पीछे विभाग की एक बहुत ही सुनियोजित और लंबी तैयारी शामिल थी। इन दोनों संस्थानों के खिलाफ पिछले काफी समय से विभाग को विभिन्न माध्यमों से टैक्स चोरी की गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों की सत्यता जांचने के लिए विभाग ने अपने विशेष सूचना तंत्र को सक्रिय किया।
विभागीय अधिकारियों ने खुद आम नागरिक या अभिभावक बनकर इन संस्थानों की कार्यप्रणाली, छात्रों की वास्तविक संख्या, फीस के पैकेजेस और रसीद देने के तरीकों की बारीकी से पूरी जानकारी जुटाई। इसके बाद, विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों ने अपने सेंट्रलाइज्ड विभागीय डिजिटल पोर्टल पर इन दोनों संस्थानों द्वारा पिछले वर्षों में जमा की जा रही नियमित कर अदायगी और टैक्स रिटर्न (GSTR) का गहन तकनीकी परीक्षण किया। जब पोर्टल के डेटा और फील्ड से मिली जानकारियों में भारी अनियमितताएं और अंतर पाया गया, तब जाकर इस बड़े छापे की रूपरेखा तैयार की गई।
गुरुवार सुबह जब एसजीएसटी (SGST) एंटी-इवेजन विंग, जयपुर और स्थानीय प्रवर्तन शाखा की टीमें गंगापुर सिटी स्थित इन संस्थानों के परिसरों में दाखिल हुईं, तो वहां मौजूद प्रबंधन में पूरी तरह अफरा-तफरी मच गई। अधिकारियों ने तुरंत दोनों परिसरों के मुख्य द्वारों को अपने नियंत्रण में ले लिया और लेखा विभाग के सभी कंप्यूटरों, हार्ड डिस्क, फीस रजिस्टरों और कैश काउंटरों को सील कर दिया।
देर शाम तक जारी रही इस जांच और सर्वे की कार्रवाई के दौरान विभागीय टीमों ने कोचिंग परिसरों के खुफिया केबिनों से कई बेहद महत्वपूर्ण और गुप्त दस्तावेज बरामद किए हैं। इन दस्तावेजों में छात्रों की वास्तविक संख्या, नकद फीस संग्रह के कच्चे रजिस्टर, और समानांतर रूप से बनाए गए वास्तविक लेखा रिकॉर्ड शामिल हैं। इसके साथ ही, टीमों ने मौके पर मौजूद और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे विद्यार्थियों से भी उनकी फीस और कक्षाओं के संबंध में सीधे इनपुट लिए हैं, जिनका मिलान अब जब्त किए गए मुख्य दस्तावेजों से किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार इन दो संस्थानों से करीब 5 करोड़ रुपए की कर चोरी पकड़ी गई है। वहीं वाणिज्यिक कर विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मौके पर जब्त किए गए तमाम दस्तावेजों, कंप्यूटर बैकअप और प्रतियोगी परीक्षाओं के विद्यार्थियों द्वारा जमा कराई गई वास्तविक शुल्क राशि का विश्लेषण करने के लिए विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित की जा रही है। इस गहन विश्लेषण और फॉरेंसिक अकाउंटिंग के आधार पर ही कर चोरी की वास्तविक और अंतिम राशि का सटीक आकलन किया जाएगा।
विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि यह जांच प्रक्रिया काफी विस्तृत है और इसमें समय लग सकता है। फिलहाल विभाग की ओर से इस कार्रवाई को लेकर कोई भी आधिकारिक प्रेस नोट या औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन प्रारंभिक आकलन के अनुसार यह मामला कई करोड़ रुपए की सीधे तौर पर जीएसटी (GST) चोरी से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है। विभाग ने साफ किया है कि राजस्थान राज्य में कर चोरों के विरुद्ध इस प्रकार की जीरो टॉलरेंस की सख्त कार्रवाइयां आने वाले दिनों में भी पूरी निरंतरता के साथ जारी रहेंगी।
Published on:
19 Jun 2026 10:16 am
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