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Ranthambore: टाइगर सफारी पार्क अटका, 2 बार प्रस्ताव भेजने के बाद भी नहीं मिली मंजूरी, जानें क्यों

Ranthambore Tiger Project: रणथम्भौर में बाघों की बढ़ती संख्या और उन्हें बेहतर पर्यावास उपलब्ध कराने के लिए वन विभाग ने दो बार टाइगर सफारी पार्क विकसित करने की योजना बनाई, लेकिन दोनों ही बार मामला अटक गया।
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सवाई माधोपुर

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Anil Prajapat

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Updated: 6 May 2026, 2:27 PM IST

Ranthambore tiger reserve

रणथम्भौर राष्ट्रीय पार्क (फोटो-पत्रिका)

सवाईमाधोपुर । रणथम्भौर में बाघों की बढ़ती संख्या और उन्हें बेहतर पर्यावास उपलब्ध कराने के लिए वन विभाग ने दो बार टाइगर सफारी पार्क विकसित करने की योजना बनाई, लेकिन दोनों ही बार मामला अटक गया। सबसे पहले 2014-15 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने इसकी कवायद शुरू की थी।

इसके तहत रणथम्भौर के अधीन आने वाले टोंक जिले के आमली वनखण्ड में 900 हैक्टेयर भूमि का आवंटन किया गया था। हालांकि सरकार बदलने के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। बाद में इस क्षेत्र को रेस्क्यू सेंटर के रूप में विकसित करने की मांग भी उठी, लेकिन वह भी धरातल पर नहीं उतर सकी। इसके बाद वन विभाग ने रणथम्भौर रोड स्थित इंडेन गैस गोदाम की जमीन पर सफारी पार्क विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया। अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण भी किया, लेकिन अब तक विभागीय स्तर पर एनओसी जारी नहीं होने से मामला अटका हुआ है।

अधिकारियों ने किया था निरीक्षण

वन विभाग के प्रस्ताव भेजने के बाद उच्चाधिकारियों ने संबंधित जगह का निरीक्षण किया था। इसके बावजूद अब तक उच्च स्तर पर कोई लिखित अनुमति जारी नहीं हुई है।

24 वर्ष से बेकार पड़ी जमीन

रणथम्भौर से सटी आइओसीएल की लगभग 100 बीघा जमीन पिछले 24 वर्षों से बेकार पड़ी है। पूर्व में आइओसीएल ने इसे वन विभाग को सौंप दी थी। इस जमीन पर सफारी पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई थी। विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजा, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

पर्यटन को मिलते नए आयाम

नया सफारी पार्क बनने से रणथम्भौर में पर्यटन को नए आयाम मिलते। इससे पर्यटकों के लिए नए रास्ते खुलते और पर्यटन में इजाफा होता। साथ ही पीक सीजन के दौरान मुख्य जोनों पर पर्यटकों का दबाव भी कम होता।

गत वर्ष फिर से शुरू किए प्रयास

रणथम्भौर रोड पर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन का गैस प्लांट पहले संचालित था, लेकिन रणथम्भौर बाघ परियोजना के कारण इसे बंद कर दिया गया। बाद में आइओसीएल ने यह भूमि वन क्षेत्र में होने के कारण वन विभाग को सौंपने के लिए पत्र लिखा था। इसी के बाद वर्ष 2025 में वन विभाग ने इस जगह पर सफारी पार्क विकसित करने की योजना बनाई। औद्योगिक उपयोग की भूमि को पर्यावरणीय और पर्यटन विकास के लिए पुनः प्रयोजित किया जा सकता है। अब प्रस्ताव उच्चाधिकारियों के पास लम्बित है।

यह था उद्देश्य

रणथम्भौर में वर्तमान में क्षमता से अधिक बाघ-बाघिन हैं। ऐसे में क्षेत्र को लेकर उनके बीच संघर्ष की आशंका बनी रहती है। पूर्व में भी इस प्रकार के कई मामले सामने आ चुके हैं। यदि सफारी पार्क विकसित होता तो इस संकट से काफी हद तक निजात मिल सकती थी। साथ ही घायल और वृद्ध बाघों के लिए बड़ा एनक्लोजर बनाने का भी प्रस्ताव था, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में है।

इनका कहना है

इस संबंध में पूर्व में विभाग की ओर से प्रस्ताव भेजा गया था और उच्चाधिकारियों की ओर से मौका मुआयना भी किया गया था, लेकिन अभी तक लिखित अनुमति नहीं मिली है।
-संजीव शर्मा, उपवन संरक्षक (पर्यटन), रणथम्भौर बाघ परियोजना

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