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दिल्ली के डॉक्टरों ने 6 महीने के केन्याई बच्चे को दिया नया जीवन

दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में लाया गया टॉसिंग-बिंग एनोमली से पीड़ित बच्चा खून में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण त्वचा का रंग पड़ गया था नीला डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान
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नई दिल्ली

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Priya Singh

•

Updated: 30 Mar 2019, 4:30 PM IST

Delhi doctors give new life to 6 month Kenyan child

दिल्ली के डॉक्टरों ने 6 महीने के केन्याई बच्चे को दिया नया जीवन

नई दिल्ली। छह महीने की नाजुक उम्र में केन्या से आए बच्चे इमेन्युअल लीला कमांक की ओपन हार्ट सर्जरी इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में की गई। बच्चा एक दुर्लभ जन्मजात दिल की बीमारी सायनोटिक टॉसिंग-बिंग एनोमली से पीड़ित था। पैदा होने के चार दिनों के बाद इस बीमारी का पता चला। बच्चे की हालत बिगड़ती जा रही थी, जिसके चलते उसे सर्जरी के लिए delhi के अपोलो हॉस्पिटल लाया गया।

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट व पीडिएट्रिक कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. मुथु जोथी ने कहा, "जब इमेन्युअल को अपोलो लाया गया, वह सायनोटिक से पीड़ित था। उसके खून में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण त्वचा का रंग नीला पड़ता जा रहा था। जांच करने पर हमने पाया कि उसकी सांस लेने की दर प्रति मिनट सिर्फ 20 थी, जो सामान्य से बहुत कम थी।"

डॉ. जोथी ने कहा, "बच्चे में आयोर्टा दाएं वेंट्रिकल से जुड़ी हुई थी, जबकि सामान्य अवस्था में यह बाएं वेट्रिकल से जुड़ी होती है। साथ ही उसकी पल्मोनरी आर्टरी भी दाएं वेंट्रिकल से जुड़ी थी, जो असामान्य है। इसे डबल आउटलेट राइट वेंट्रिकल डिफेक्ट कहा जाता है। जांच करने पर पता चला कि उसकी आयोर्टा में एक ब्लॉक भी था। इसके अलावा बच्चे में बड़ा सब-पल्मोनरी वेंट्रीकुलर सेप्टल डिफेक्ट, आट्रियल सेप्टल डिफेक्ट और पेटेंट डक्टस आर्टीरियोसस भी था। इस दुर्लभ बीमारी में जब बच्चा मां के गर्भ में होता है तो खुली ब्लड वैसल जिसे बंद हो जाना चाहिए, वह बंद नहीं हो पाती।"

उन्होंने कहा, "यह मामला बेहद गंभीर था, सर्जरी के बाद भी बच्चे के ठीक होने की संभावना बहुत कम थी। हालात को देखते हुए हमने इलाज की योजना बनाई। हमने परिवार को जानकारी दी कि उसकी सर्जरी में 50-60 फीसदी जोखिम है। परिवार ने जोखिम लेने के लिए सहमति दी और हमने सर्जरी करने का फैसला ले लिया।" 21 जनवरी, 2019 को डॉ. मुथु जोथी ने बच्चे की सर्जरी की। उनकी टीम में डॉ मनीषा चक्रवर्ती और डॉ. रीतेश गुप्ता शामिल थे।

डॉ. मुथु जोथी ने कहा, "पूरी प्रक्रिया टोटल सकुर्लेटरी अरेस्ट में की गई, यानी शरीर के पूरी खून को हार्ट लंग मशीन में ड्रेन किया जा रहा था। इससे पहले हमें बच्चे के शरीर को 16 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा रखना था। यह मनुष्य के शरीर के लिए जमा देने वाला तापमान होता है। हमें उसके दिमाग की सतह पर पर बर्फ रखनी पड़ी।"

उन्होंने कहा, "बिना सकुर्लेशन के हम मरीज को अधिकतम 45 मिनट के लिए रख सकते हैं। इसके बाद दिमाग, स्पाइनल कोर्ड, किडनी एवं अन्य अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा होता है। इमेन्युअल को 30 मिनट के लिए टोटल सकुर्लेटरी अरेस्ट पर रखा गया। इस दौरान हमने आयोर्टिक आर्च की मरम्मत की, इसके लिए पीडीए ब्लड वैसल को डिसकनेक्ट किया और इसे आयोर्टिक आर्च के साथ कनेक्ट किया गया।"

उन्होंने कहा, "इसके बाद हमने बच्चे को फिर से हार्ट-लंग मशीन पर डाला, और खून की वाहिकों की पॉजिशन ठीक की। इंट्राम्यूरल कोरोनरी आर्टरी बहुत ही मुश्किल स्थिति में थी, हमें इस वाहिका को नई आयोर्टा में इम्प्लांट करना था। इस प्रक्रिया में आधे मिलीमीटर की गलती भी हार्ट अटैक का कारण बन सकती है। इसके बाद वेंट्रीकुलर सेप्टल डिफेक्ट और आट्रियल सेप्टल डिफेक्ट को ठीक किया गया। सर्जरी 9 घंटे तक चली।" इसके बाद बच्चा धीरे-धीरे ठीक होने लगा और 17वें दिन उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।