इंसानों से पहले जानवरों ने की थी अंतरिक्ष की यात्रा, जानें कितनों की हुई मृत्यु कितने बचे जिंदा

इंसानों से पहले जानवरों ने की थी अंतरिक्ष की यात्रा, जानें कितनों की हुई मृत्यु कितने बचे जिंदा

Prakash Chand Joshi | Publish: Oct, 21 2019 12:45:20 PM (IST) विज्ञान और तकनीक

  • अब भी जीव-जानवरों को भेजा जाता है अंतरिक्ष में

नई दिल्ली: आज वैज्ञानिकों ने इतनी तरक्की की है कि अंतरिक्ष में इंसान भी जानें लगें हैं। लेकिन क्या वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में सीधे इंसान को भेजा? मतलब कि इससे पहले भी क्या कुछ और भेजा गया था? आखिर इंसानों को भेजना संभव कैसे हुआ? दरअसल, पहली बार 1947 में सोवियत संघ ने एक मक्खी को अंतरिक्ष में भेजा। इसके दस साल बाद 1957 में सोवियत संघ ने एक फीमेल डॉग को अंतरिक्ष में भेजा, लेकिन रॉकेट लॉन्च के कुछ घंटों बाद लाइका मर गई।

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लाइका की मौत हो गई, लेकिन सोवियत संघ द्वारा अंतरिक्ष में डॉग को भेजना जारी रहा। इसके लिए रॉकेट को ज्यादा सुरक्षित बनाया जाने लगा। वहीं साल 1960 में स्ट्रेल्का और बेल्का नाम के कुत्तों को अंतरिक्ष में वापस भेजा गया। सबसे खास बात ये रही कि ये दोनों ही धरती पर सुरक्षित वापस लौटे। दूसरी तरफ अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा बंदरों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारियां कर रही थी। साल 1958 में नासा ने गोर्डो नाम के एक बंदर को अंतरिक्ष में भेजा, लेकिन उसकी मौत हो गई। वहीं नासा ने साल 1959 में बेकर और एबल नाम के दो बंदरों को अंतरिक्ष में भेजा और ये दोनों सुरक्षित वापस लौट आए।

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सैम नाम के बंदर पर अंतरिक्ष यात्रियों को जिंदा रखने वाले कैप्सूल का टेस्ट हुआ और सैम इस टेस्ट में पास हो गया। कुत्ते और बंदरों के बाद हैम नाम के चिम्पांजी को पहली बार अंतरिक्ष में भेजा गया। 6 मिनट तक उसने भारहीनता का सामना किया और जिंदा लौट आया। इसकी मदद से अध्ययन कर पता चला कि भारहीनता में शरीर कैसे काम करता है। इन सब के बाद इंसानों को अंतरिक्ष में भेजना शुरु किया गया। लेकिन ऐसा नहीं है कि जीवों को अब अंतरिक्ष में नहीं भेजा रहा रहा। साल 2007 में यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने टार्डीग्रेड के सूक्ष्म जीवों को अंतरिक्ष में भेजा और वो 12 दिन तक जिंदा रहे। ऐसे में कहा जा सकता है कि इंसानों के अंतरिक्ष में पहुंचने में जीव-जानवरों ने अहम रोल निभाया है।

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