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वैज्ञानिकों ने बनाया ऐसा वायरस जो लड़ेगा खतरनाक वायरसों से

-देश में अचानक कोरोना प्रकोप के उभरने के बावजूद इससे निजात पाने वालों में दक्षिण कोरिया सबसे पहला देश है।
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जयपुर

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Mohmad Imran

•

Updated: 5 Apr 2020, 3:31 AM IST

वैज्ञानिकों ने बनाया ऐसा वायरस जो लड़ेगा खतरनाक वायरसों  से

वैज्ञानिकों ने बनाया ऐसा वायरस जो लड़ेगा खतरनाक वायरसों से

दुनिया भर में फैल चुका कोविड-19 कोरोनावायरस आज सबसे बड़ा स्वस्थ्य जोखिम बनकर उभरा है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दुनिया ऐसी आपातकालीन स्थिति का सामना कर रही है। लेकिन हाल ही एक अच्छी खबरभी सामने आई है। वैज्ञानिकों ने दावा किया हैकि उन्होंने एक ऐसा वायरस तैयार कर लिया है जो फ्लू और कोविड-19 जैसे खतरनाक वायरस से लडऩे में सक्षम है। बर्लिन स्थित फोर्सचुंग्सवर्बंड ई.वी. आठ वैज्ञानिक संस्थाओं का एक संगठन है। इसी संगठन के वैज्ञानिकों के दल ने इस वायरस की ऐसी कोशिकाएं (वायरस सैल) बनाई हैं जो फेफड़ों की कोशिकाओं की नकल कर कोविड-१९ वायरस से लड़ सकता है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस सबसे ज्यादा हमारे फेफड़ों को ही नुकसान पहुंचाता है, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण मनुष्य दम तोड़ देता है।

एंटीबायोटिक दवाओं का विकल्प
वैज्ञानिकों ने इस वायरस का नाम बैक्टीरियोफेज या फेज कैप्सिड रखा है। यह वायरस का ही एक प्रकार है जो दरअसल एंटी-बायोटिक दवाओं के विकल्प के रूप में तैयार किए गए थे। ये आमतौर पर रोगाणुओं अधिकतर जीवाणुओं को खाकर जिंदा रहते हैं। शोध के प्रमुख लेखक डैनियल लॉस्टर ने बताया कि यहनया वायरस संक्रामक नहीं है और इसमें 180 प्रोटीन के गुण शामिल हैं जो इसके लिए रिसेप्टर्स की तरह काम करते हैं। इसलिए यह इन्फ्लूएंजा वायरस को धोखा देने में सफल रहता है। दूसरे शब्दों में हम इन्फ्लूएंजा वायरस को निष्क्रिय करने के लिए बैक्टीरियोफेज वायरस का उपयोग करते हैं। टीम काकहना है कि अभी भी बहुत काम करना बाकी है। वैज्ञानिकों को विश्वास है कि यह वायरस तकनीक उन दवाओं को बनाने में काम आ सकती है जो कोरोना वायरस के संक्रमण को रोक सकती हैं। अगर सफता मिलती है तो यह वायरस भविष्य के किसी भी कोरोनोवायरस के प्रकोप के लिए संभावित हथियार के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

ऐसे काम करता है बैक्टीरियोफेज
शोधकर्ताओं का कहना है कि फेज वायरस चरणबद्ध तरीके से कोविड-19 जैसे फ्लू के वायरस को फेफड़ों की कोशिकाओं की नकल कर एक तरह से अपने जाल में फंसाता है। इसके बाद अपने जाल में फंसे फ्लू के वायरस की सतह को हेमाग्लुटिनिन नाम के प्रोटीन रिसेप्टर्स से ढक देता है, जो फ्लू वायरस को अप्रभावी बना देता है।

बहुत काम का है वायरस
-निमोनिया में सांस लेने में तकलीफ होने पर के इलाज करने में
-घावों को कीटाणुओं को नष्ट कर जल्द ठीक करने में
-खाना फैक करने के एंटीबैक्टीरियल फूड रैप के रूप में
-फूड पॉइजनिंग में शरीर को विषाक्तता से बचाने में
-वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे कोविड-१९ वायरस से लडऩे में भी मदद मिल सकती है। हालांकि उस पर परीक्षण करना बाकी है
-गणितीय मॉडल और क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप अध्ययनों से यह भी पता चला है कि बैक्टीरियोफेज वायरस एवियन फ्लू वायरस सहित वायरस के अन्य प्रकारों के खिलाफ भी प्रभावी था
-शोध के अन्य शोधकर्ता क्रिश्चियन हैकेनबर्गर का कहना था कि पशुओं और कोशिकाओं पर प्रयोग करने से पता चला कि फेज कैप्सिड मानव फेफड़ों के ऊतकों में फ्लू को बेअसर करने में भी सक्षम था और वायरस पुन: प्रजनन को भी रोक रहा था