200 साल से घट रही है पृथ्वी की चुंबकीय ताकत, सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से हुआ खुलासा

  • Earth Magnetic Field Weak : यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के सैटेलाइट स्वार्म (Swarm) से पता चला कि पृथ्वी की चुंबकीय शक्ति कमजोर हो गई है
  • करीब 10 हजार किलोमीटर क्षेत्र हुआ प्रभावित, अफ्रीका से दक्षिण अमेरिका में ज्यादा नुकसान

By: Soma Roy

Published: 23 May 2020, 04:08 PM IST

नई दिल्ली। कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) से पूरी दुनिया परेशान है। वहीं वैज्ञानिकों ने पृथ्वी (Earth) की घटती ताकत के बारे में बताकर सबकी चिंता और बढ़ा दी है। शोधकर्ताओं के अनुसार पृथ्वी की चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) की शक्ति कम होती जा रही है। इसका सबसे ज्यादा असर अफ्रीका से दक्षिण अमेरिका के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। जलवायु परिवर्तन के बाद ये एक बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है। इससे आने वाले दिनों में भीषण गर्मी पड़ने और तूफान, ओलावृष्टि और भूकंप जैसी आपदाओं का भी कारण बन सकता है।

यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने दी सूचना
धरती के चुंबकीय क्षेत्र में आई कमजोरी की जानकारी यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) के सैटेलाइट स्वार्म (Swarm) से मिली है। उन्होंने इस प्रभाव को ‘साउथ एटलांटिक एनामोली’ (South Atlantic Anomaly) नाम दिया है।

9 फीसदी तक घटी क्षमता
वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले 200 सालों से धरती की चुंबकीय शक्ति लगातार घट रही है। अभी तक इसमें करीब 9 फीसदी की कमी आई है। अफ्रीका से दक्षिण अमेरिका तक चुंबकीय शक्ति में सबसे ज्यादा कमी देखी जा रही है. साइंटिस्ट इसे साउथ अटलांटिक एनोमली (South Atlantic Anomaly) कहते हैं।

10 हजार किलोमीटर क्षेत्र में कमजोरी
अध्ययन में पता चला कि धरती के 10 हजार किलोमीटर में तक के इलाके में चुंबकीय शक्ति कमजोर हो गई है। चूंकि पृथ्वी के बाहरी परत में 3000 किलोमीटर नीचे चुंबकीय क्षेत्र है। सामान्य तौर पर इसे 32 हजार नैनोटेस्ला होनी चाहिए थी, लेकिन 1970 से 2020 तक यह घटकर 24 हजार से 22 हजार नैनोटेस्ला तक जा पहुंची है।

रेडिएशन का बढ़ा खतरा
धरती की चुंबकीय शक्ति खत्म होने से रेडिएशन का खतरा बढ़ गया है। क्योंकि इसी शक्ति की वजह से ही हम अंतरिक्ष से आने वाली रेडिएशन से बचे रहते हैं। मगर पृथ्वी की ताकत कम होने से ये सीधे धरती पर आएंगे, जिससे कई तरह के नुकसान हो सकते हैं।

सैटेलाइट्स में आ सकती है खराबी
पृथ्वी की चुंबकीय शक्ति के सहारे सभी प्रकार की संचार प्रणालियां जैसे— सैटेलाइट, मोबाइल, चैनल आदि काम करते हैं। मगर इसके खत्म या कमजोर होने से सभी चीजें ध्वस्त होने लगेंगी। इससे सैटेलाइट सिस्टम फेल हो जाएंगे। साथ ही विमान में भी तकनीकी खराबियां आ सकती हैं।

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