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मंगल पर दोबारा मिले जीवन के सबूत, नासा ने खोजा कार्बनिक मिश्रण

Life On Mars : मंगल गह पर मिले जीवन के अंश का नाम उसका नाम थायोफीन्स है मार्स क्यूरियोसिटी रोवर ने इसकी खोज की है
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Soma Roy

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Updated: 22 Apr 2020, 12:32 PM IST

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Life On Mars

नई दिल्ली। मंगल (Mars) ग्रह पर जीवन को लेकर हमेशा से बहस होती आई है। हाल ही में नासा (NASA) के रोवर को मिले नए सबूतों ने दोबारा उम्मीद की एक किरण जगाई है। नासा के वैज्ञानिकों ने बताया कि मार्स क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह की मिट्टी पर कार्बनिक मिश्रण खोजा है। रोवर ने जिस कार्बनिक मिश्रण यानी जीवन के अंश की खोज की है उसका नाम थायोफीन्स (Thiophenes) है। इसे अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

नासा का दावा है कि यह कार्बनिक मिश्रण दो तरीके से बन सकते हैं। पहला जैविक और दूसरा अजैविक। शोधकर्ता जैकब हीन्ज और डर्क शल्ज माकुश ने कहा कि मंगल ग्रह पर थायोफीन्स का मिलना जीवन के संकेत को दर्शाता है। उनकी ये रिपोर्ट साइंस जर्नल एस्ट्रोबायोलॉजी में प्रकाशित हुई है। मंगल ग्रह पर मिले कार्बनिक यौगिक के विस्तृत खोज के लिए एक अन्य रोवर को भेजा जा सकता है। अभी मंगल ग्रह पर नासा का रोबोट क्यूरियोसिटी घूम रहा है, जो जीवन के कई संकेत दे रहा है। रोवर क्यूरियोसिटी के खोजबीन से भी ये दावा पुख्ता हुआ है, लेकिन इसकी गहन जांच के लिए अब रोजालिंड फ्रैंकलिन को भेजे जाने की तैयारी है। इसे साल 2022 पर मंगल ग्रह पर भेजने की उम्मीद है।

मंगल ग्रह पर मिले कार्बनिक यौगिक के बारे में रिसर्च करने वाले वैज्ञानिक हीन्ज और माकुश के मुताबिक थायोफीन्स जैसे कार्बनिक मिश्रण दो तरीके से बन सकते हैं। जैविक रूप में यह उसी ग्रह पर जीवन सूक्ष्म रूप में मौजूद हो सकते हैं। दूसरे विकल्प में ये किसी उल्कापिंड से ग्रह पर आने वाले जीवन को दर्शाता है। अगर इसकी रासायनिक प्रक्रिया को देखे तो थायोफीन्स 120 डिग्री सेल्सियस पर सल्फेट रि़डक्शन से भी बन सकते हैं। उनका मानना है कि थायोफीन्स मंगल ग्रह पर 300 करोड़ साल पुराने हो सकते हैं।