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भूकंपीय तरंगों से पानी में होने वाले केमिकल रिएक्शन का लगेगा पता, वैज्ञानिकों ने किया दावा

Seismic Waves Used To See Chemical Reaction : पेन यूनिवर्सिटी की ओर से जमीन के अंदर होने वाली हलचल और उससे पानी पर पड़ने वाले असर पर एक अध्ययन किया गया शोधकर्ताओं ने उपकरण के जरिए जमीन के अंदर हलचल पैदा की, साथ ही पानी के स्त्रोतों की खोज की
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नई दिल्ली

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Soma Roy

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Updated: 30 Jul 2020, 2:15 PM IST

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Seismic Waves Used To See Chemical Reaction

नई दिल्ली। वैसे तो जमीन के अंदर टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) में होने वाली हलचल खतरे की निशानी होती है। क्योंकि इससे भूकंप (Earthquake) का खतरा रहता है, लेकिन अब यही भूकंपीय तरंगे पानी की क्वालिटी चेक करने एवं उनमें होने वाले रासायनिक परिवर्तनों के बारे में बताएगी। इस सिलसिले में पेन यूनिवर्सिटी की ओर से एक अध्ययन किया गया। जिसमें दावा किया गया कि भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) से वे जमीन के नीचे जमे पानी पर होने वाले रासायनिक परिवर्तन (Chemical Changes) देख सकते हैं।

पेन यूनिवर्सिटी की अर्थ एंड एनवायर्नमेंटल सिस्टम इंस्टीट्यूट (EESI) की निदेशक और जियोसाइंस की प्रोफेसर सूजन ब्रैंटली ने बताया कि भूकंपीय तरंगे ऊर्जा की ऐसी लहर होती हैं जो पृथ्वी से होकर गुजरती हैं। जिससे धरती में भूंकप आते हैं। अगर यही क्रिया तकनीक के जरिए जमीन में किया जाए तो इससे पानी के स्त्रोतों और उसकी गुणवत्ता का पता लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं इन तरंगों की वजह से पानी में किस तरह के रासायनिक बदलाव होते हैं। इस बात को भी समझा जा सकता है।

प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ताओं ने अपने उपकरण ससक्वेहाना सेल हिल्स क्रिटिकल जोन ऑबजर्वेटरी की रिसर्च साइट पर 115 फीट गहरे गड्ढे में उतारें। उन्होंने यहां नकली भूकंपीय तरंगे पैदा की, जिससे जमीन में हलचल हुई। उन्होंने रिसर्च में तरंगों की गति मापी। साथ ही देखा कि इससे क्या बदलाव आते हैं। अध्ययन के अनुसार यदि तरंगों की गति तेज होती है तो इसका मतलब है कि वे ठोस चट्टानों और छिद्रों में भरे पानी के जरिए तेजी से गतिमान हैं। जबकि तरंगों की गति कम होने पर ये अवसादी शैलों से होकर गुजरती हैं, जहां चट्टानों या मिट्टी के छिद्रों में हवा भरी हुई होती है।