
हमारे पूर्वज कौन थे? इन दांतों के आकर को देख वैज्ञानिक भी हैं हैरान
नई दिल्ली। बड़े-बड़े वैज्ञानिक मानव जाती ( homo sapiens ) की उत्पत्ति की पहेली को सुलझाने में लगे हुए हैं। नई-नई तकनीकों के विकास के साथ वैज्ञानिक डीएनए ( dna ) तकनीकों पर ज्यादा भरोसा करते हैं। इसी के साथ मॉलिक्यूलर क्लॉक ( Molecular clock ) का भी सहारा लिया जाता है। बता दें कि मॉलिक्यूलर क्लॉक से किसी भी जाति के परिवर्तन का मूल्यांकन किया जाता है। डीएनए और मॉलिक्यूलर क्लॉक के साथ वैज्ञानिकों को जीवाश्म में मिले दांतों का परीक्षण करने की एक नई तकनीक का पता चला है। यह तकनीक निएंडरथल ( Neanderthal ) और आधुनिक मानव के बीच के अंतर को अधिक अच्छे से समझाता है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन ( London ) की आईदा गोमेज रॉबल्स का कहना है कि दोनों प्रजातियों का जो आखिरी पूर्वज था वह कम से कम 8 लाख साल पहले धरती पर मौजूद था। आधुनिक मानव और निएंडरथल के बीच के अंतर की बहस मानव शास्त्रियों में गर्म रहती है। हमारी प्रजाति मौजूदा टाइमलाइन की तुलना में 2 से 4 लाख साल पुरानी है। अगर यह दावा सच निकलता है तो होमो हाइडेलबेरगेंसिस खारिज हो जाएगा। हाइडेलबेरगेंसिस Heidelbergensis एक विलुप्त प्रजाति या होमो पुरातन मनुष्यों की उप प्रजातियां हैं। यह लगभग 700,000 से 300,000 साल पहले मध्य प्लेस्टोसीन में विकिरणित हुईं। प्लेस्टोसीन दक्षिणी अफ्रीका, पूर्वी अफ्रीका और यूरोप में पाए गए जीवाश्मों के नाम से जानी जाती हैं।
हाइडेलबेरगेंसिस प्रजाति होमो सेपियंस और हमारे नजदीकी पूर्वज निएंडरथल के बीच में आती है। शोधकर्ता गोमेज रोबल्स का शोध हाल ही में साइंस एंडवांसेज में प्रकाशित हुआ है। रॉबल्स ने 30 जीवाश्मों की दाढ़ और उससे आगे के चबाने वाले दांतों का परीक्षण किया है। इन्हें पहले स्पेन से मिले निएंडरथल और सात दूसरी लुप्त हो चुकी प्रजातियों का दांत माना जाता था। गोमेज यह देखना चाहती थीं कि समय के साथ इनमें कितना बदलाव हुआ है।
Published on:
17 May 2019, 12:51 PM IST
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