
हैदराबाद के इस शख्स ने प्लास्टिक से बनाया पेट्रोल, प्रतिदिन बनाते हैं 200 लीटर
नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने प्लास्टिकplastic को कम करने के लिए विकल्प के तौप पर कई तरह के inventionआविष्कार करने के दावे बीते समय में किए थे, लेकिन इन दावों को अब तक हकीकत में नहीं बदला जा सका। कुछ समय पहले इसी प्लस्टिक से amricaअमरीका के वैज्ञानिकों ने पेट्रोल बनाने की बात कही थी, लेकिन इसे हैदराबाद के एक 45 वर्षीय प्रोफेसर ने पूरा कर दिखाया है।
प्लास्टिक पायरोलीसिस से गुजारा जाता है इस प्रक्रिया को
बता दें कि प्रोफेसर का नाम सतीश कुमार है, जिन्होंने प्लास्टिक से पेट्रोल बनाने का दावा किया है। इसके अलावा वह एक मैकेनिकल Engineer इंजीनियर भी हैं। उनका दावा है कि वह तीन चरणों की प्रक्रिया के जरिए प्लास्टिक से पेट्रोल बना सकते हैं। इस प्रक्रिया को उन्होंने प्लास्टिक पायरोलीसिस का नाम दिया है। इसमें निर्वात में प्लास्टिक को अप्रत्यक्ष रूप से गरम करने पर यह अपने संघटकों में टूट जाता है। इसके बाद गामीकरण और अणु संघनन की प्रक्रिया के बाद यह पेट्रोल में बदल जाता है।
400 डिग्री सेल्सियस तापमान पर किया जाता है गर्म
इस प्रक्रिया के बाद बहुलक अपने तत्वों (monomers ) में टूट जाता है, इसके बाद प्लास्टिक के पिघलाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। प्लास्टिक को जब दूसरे पदार्थों के साथ मिलाकर निर्वात में 350 से 400 डिग्री सेल्सियस तापमान तक गरम करने के बाद ही पेट्रोल बनता है। यह प्रक्रिया बहुत सरल और पूरी तरह से प्लास्टिक के संघटकों के टूटने पर आधारित है।
यह पायरॉयसिस ( ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में थर्मोकेमिकल प्रक्रिया के जरिए किसी वस्तु को इसके मूल अणुओं में तोड़ना ) नाम की प्रक्रिया कहलाती है। बहुलक ( polymer ) वह पदार्थ है, जब एक ही प्रकार के कई अणु एक साथ जुड़े होते हैं। तब वह बड़ा अणु बहुलक कहलाता है। यह प्रक्रिया जिसमें बहुलकों को अलग करके उन्हें पुनः अपने मूल अणु ( molecule ) में वापस लाया जाता है, उसे विबहुलकन ( depolarization ) कहा जाता है।
प्रतिदिन बनाते हैं 200 लीटर पेट्रोल
सतीश कुमार ने मीडिया को बताया कि यह प्रक्रिया निर्वात में होती है इसमें वायु प्रदूषण भी नहीं होता है। 2016 से लेकर अबतक वह करीब 50 टन प्लास्टिक को पेट्रोल में बदल चुके हैं। वह इस प्रकार के प्लास्टिक का प्रयोग करते हैं जिसे किसी भी प्रकार से दोबारा प्रयोग में नहीं लाया जा सकता है। प्रतिदिन करीब 200 किलो प्लास्टिक के प्रयोग से वह 200 लीटर पेट्रोल बनाते हैं। साथ ही ये भी बताया कि इसमें बिलकुल पानी का प्रयोग नहीं किया जाता है और ना ही इसमें पानी वेस्ट के तौर पर भी नहीं निकलता है।
40-50 रुपए प्रति लीटर बेचते हैं पेट्रोल
खबर के मुताबिक- पेट्रोल बनाने के इस अविष्कार के बाद सतीश ने बताया कि ये पेट्रोल स्थानीय व्यापारियों को 40 से 50 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचा जाता हैं। पर वाहनों में प्रयोग के लिए यह कितना उपयोगी है, इसकी जांच होना अभी बाकी है। PVC ( पॉली विनाइल क्लोराइड ) और PET ( पॉली एथेलीन टैरिफथेलेट) के अतिरिक्त सभी प्रकार का प्लास्टिक प्रयोग में लाया जा सकता है और प्लास्टिक को छांटने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
Published on:
29 Jun 2019, 9:38 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.