
सीहोर/नसरुल्लागंज. आंगनबाड़ी में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए मिड-डे योजना प्रारंभ की गई है। योजना के अंतर्गत हर दिन बच्चों को अलग-अलग तरह का भोजन देने का प्रावधान रखा गया है, लेकिन वास्तविकता में यह भोजन केवल आंगनबाड़ी में दीवार पर लगे चार्ट में ही दिखाई दे रहा है। कागजों में तो मीनू के अनुसार भोजन वितरित किया जा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और है यहां जो भोजन दिया जा रहा है वह घटिया किस्म का है जिसमें सब्जी में केवल पानी ही पानी दिखाई दे रहा है तो जली हुई रोटियां बच्चों को परोसी जा रही हैं। जो बच्चों के स्वास्थ्य से खिलबाड़ किया जा रहा है।
वार्ड क्रमांक 12की आंगनबाड़ी में शनिवार को जो भोजन दिया गया है वह मीनू के अनुसार नहीं था मीनू के अनुसार शनिवार को पराठे दाल एवं सब्जी के साथ सुबह के नाश्ते में खिचड़ी दी जानी थी, लेकिन हकीकत जब देखने को मिली तो वहां खिचड़ी के स्थान पर थोड़े से चावल पराठे के स्थान पर रोटियां सब्जी के स्थान पर केवल पानीदार सब्जी दिखाई दी और दाल पूरी तरह से गायब पाई गई। यहां पर रजिस्टर में 80 बच्चे दर्ज हैं जिनके लिए शनिवार को जो भोजन आया था उसमें रोटियों की संख्या केवल 36 थी।
36 रोटियां 80 बच्चों में बांटी जानी थी, जबकि यहां आज मीनू के अनुसार पराठे वितरित किए जाने थे। प्रत्येक बच्चे को दो पराठे मिलना चाहिए थे लेकिन पराठे भी पूरी तरह से गायब रहे जो रोटियां सब्जी और चावल दिखाई दिए वह भी घटिया स्तर के बने हुए थे इस तरह से बच्चों के साथ और उनके स्वास्थ्य के साथ आंगनबाडिय़ों में खिलवाड़ किया जा रहा है।
बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि इतने घटिया स्तर का भोजन आता है कि उसे जानवर भी मुश्किल से खाएं। इसलिए हमने अपने बच्चों को आंगनबाड़ी में भोजन करने से मना कर दिया है। इस तरह का घटिया भोजन करने से बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा था कई बच्चे आंगनबाड़ी का भोजन करने के बाद उल्टियां कर देते थे।
अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान
आंगनबाड़ी में इस तरह का भोजन कई महीनों से चल रहा है, लेकिन अधिकारियों का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि भोजन की मात्रा भी बच्चों के अनुपात में कम भेजी जा रही है। इस तरह का यह फर्जीवाड़े का खेल कई दिनों से चल रहा है। 80 बच्चों में जहां 160 पराठे भेजे जाने थे, लेकिन पराठे तो नहीं भेजे गए उसके स्थान पर केवल 36 रोटियां भेजी गई।
इस तरह से बाकी का बचा हुआ भोजन की राशि भोजन बनाने वाली संस्था डकार रही है, लेकिन इस ओर न तो किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान है न ही अधिकारियों का ध्यान है। इससे यह पता लगता है कि इस पूरे मामले में अधिकारियों की मिलीभगत से यह काम चल रहा है।
मुझे इसकी शिकायत प्राप्त हुई है, इस मामले को संज्ञान में लूंगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं से इसकी जानकारी लेकर जांच की जाएगी। त्रुटि पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गिरीश चौहान, बाल विकास परियोजना अधिकारी, नसरुल्लागंज
Published on:
6 May 2018, 3:37 PM IST
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