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अब बाघ ने किया शिकार, यहां दिखा मूवमेंट

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शहडोल

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Shiv Mangal Singh

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Updated: 3 Feb 2018, 11:59 AM IST

Tiger- Now the tiger hunts Movement showing here

शहडोल- शहडोल संभाग इन दिनों वन्य प्राणियों को लेकर खासा सुर्खियों में रहता है। कभी उनका शिकार हो जाता है। कभी बाघ का मूवमेंट देखने को मिलता है। लगातार वन्य प्राणियों के एक जंगल से दूसरे जंगल और शहरी क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे मूवमेंट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। तो वहीं उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।

नरवार बीट के जंगल में बाघ का मूवमेंट
दक्षिण वन मण्डल के वन परिक्षेत्र शहडोल के नरवार बीट के जंगल में बाघ का मूवमेंट बना हुआ है। बाघ ने बीती रात नरवार बीट के कांदादहरा के जंगल में एक बछिया का शिकार किया है। इस घटना के बाद वन विभाग के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। बाघ को शिकार होने से बचाने के लिए बीटीआर की टीम शहडोल वन परिक्षेत्र में डेरा डाल दिया है। बताया गया है कि शहडोल वन परिक्षेत्र के नरवार बीट में दक्षिण वन मण्डल के कर्मचारियों की टीम के साथ बीटीआर की दो सदस्यीय दल को बाघ की निगरानी के लिए लगाया गया है।

टीम लगातार जंगल में बाघ की निगरानी और उसकी खोज में लगी हुई है। गौरतलब है कि अभी हाल में उत्तर वन मण्डल के जयसिंहनगर वन परिक्षेत्र के कौआसरई बीट के देवरा गांव में बाघ के शिकार का मामला सामने आने के बाद वन विभाग के अधिकारी सख्ते में आ गए हैं। भोपाल से दो एपीसीसीएफ और बांधवगढ़ की टीम मामले की जांच में जुटी हुई है। इस मामले को लेकर वन विभाग का मैदानी अमला भी सख्ते में दिखाई दे रहा है। इस सम्बन्ध में रेंज ऑफीसर शहडोल वीरेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि एक बछिया का शिकार बीते दिनों नगरवार बीट में बाघ ने किया है। बछिया किसकी है अब तक नहीं पता चला है। पीओआर जारी करने कर मामला दर्ज किया गया है। इसकी जानकारी ली जा रही है कि बछिया किसकी है। पता करने के बाद उसे मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।

तीन महीने में कई वन्य प्राणियों के शिकार
वन विभाग के अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों की लगातार लापरवाही के कारण तीन महीने के बीच यह 6वीं मौत हुई है। इसके पहले चार बाघ और एक तेंदुए की मौत हो चुकी है। सबसे पहले संभागीय मुख्यालय के कल्याणपुर में 25 नवंबर को रिहायशी इलाके के पास नर बाघ का शव पाया गया था। इसके बाद गोहपारू वन परिक्षेत्र के सेमरा में 29 नवंबर को गोली मारकर तेंदुए का शिकार। इसके बाद 03 दिसंबर को अर्जुनी में एक बाघ की मौत का मामला सामने आया था। 11 दिसंबर को घुनघुटी वन परिक्षेत्र के काचोदर में एक बाघिन और एक शावक का शिकार किया गया था। 27 जनवरी को जयसिंहनगर वन परिक्षेत्र में नर बाघ की मौत ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।