
Railway Land Dispute: शिवपुरी में रेलवे ने बदरवास स्टेशन के पास बसे 200 परिवारों को थमा घर खाली करने का नोटिस (फोटो सोर्स- Patrika)
Indian Railway: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के बदरवास नगर परिषद के वार्ड 14 में मंगलवार को उस समय हडकंप मच गया, जब रेलवे और आरपीएफ की संयुक्त टीम अधिग्रहित रेलवे भूमि पर पहुंची। टीम ने लोगों को समझाइश देते हुए मकान खाली करने के निर्देश दिए। वर्षों से यहां रह रहे परिवारों का कहना है कि उन्हें पहली बार पता चला कि जिस भूमि पर उन्होंने अपने मकान बनाए है, वह रेलवे विभाग की है। यह जानकारी मिलते ही करीब 150 परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया। लोगों का कहना है कि पिछले 24 घंटे से कई घरों में भोजन तक नहीं बना और पूरे क्षेत्र के परेशानी है।
स्थानीय लोगों की माने तो वे वर्ष 1965 से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। समय के साथ लोगों ने अपने मकान बनाए, बच्चों का पालन पोषण किया और कई परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिला। किसी ने रजिस्ट्री के आधार पर तो अधिकांश लोगों ने नोटरी के आधार पर मकान बना लिए और वर्षों निवास कर रहे है। नगर परिषद के सर्वे से नंबर 15, 16, 17, 18, 19 और 20 में लगभग 20 बीघा भूमि पर करीब 200 मकान बने हुए है।
रेलवे विभाग का कहना है कि यह भूमि (Railway Land Dispute) वर्ष 1985 में अधिग्रहित की जा चुकी थी। अब विभाग अपनी आवश्यकता के अनुसार इस भूमि पर निर्माण कार्य प्रारंभ करने जा रहा है। इसी कारण क्षेत्र को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अचानक हुई कार्रवाई से तो क्षेत्र के लोग सकते में हैं। उनका कहना है कि यदि मकान हटाए गए उनके सामने रहने का कोई विकल्प नहीं बचेगा। प्रभावित परिवार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से राहत तथा पुनर्वास की मांग कर रहे है।
वार्ड 14 बारई मार्ग पर रेलवे स्टेशन के समीप करीब 200 मकान है। कुछ पर परिवारों के पास रजिस्ट्री है, जबकि अधिकांश लोगों ने नोटरी के आधार मकान बनाए। इसी आधार पर कई परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिला और उन्होंने पक्के मकानों का निर्माण कराया।
रेलवे भूमि विवाद में सामने आए दस्तावेज के अनुसार करीब 10 रुपए के नोटरी स्टाम्प पर पांच लोगों के हस्ताक्षर कर भूमि का विक्रय दर्शाया गया था। इसी नोटरी के आधार पर गिरधारीलाल कुशवाहा द्वारा भूरेलाल चंदेल के नाम जमीन बेचे जाने का उल्लेख है। बाद में इसी दस्तावेज को आधार बनाकर भूरेलाल ने मकान का निर्माण कराया और वर्षों से परिवार सहित निवास करते रहे। अब रेलवे द्वारा भूमि पर स्वामित्व का दावा करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू किए जाने से नोटरी के आधार पर हुए ऐसे सौदों की वैधता और भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। लगभग 150-200 परिवार बेघर होने की आशंका से चिंतित है।
रेलवे विभाग व आरपीएफ की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षेत्रवासियों से संवाद किया। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भूमि वर्ष 1985 में रेलवे के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है। अब विभाग इस भूमि पर आवश्यक निर्माण कार्य कराएगा, इसलिए सभी लोगों से स्वेच्छा से मकान खाली करने को कहा गया है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में मकान खाली नहीं किए गए तो प्रशासन की सहायता से नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला अत्यंत गंभीर है। यदि लगभग 200 मकान मालिक बेघर होते हैं तो यह एक बड़ी सामाजिक और मानवीय समस्या होगी। मामले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समक्ष रखेंगे और प्रभावित परिवारों को राहत के लिए आवश्यक पहल करने का आग्रह करेंगे, ताकि सभी प्रभावित परिवारों के हित में समाधान करें। - भूपेन्द्र यादव, उपाध्यक्ष नपा ,बदरवास।
रेलवे लाइन बिछाने के दौरान वर्ष 1985 में संबंधित भूमि का विधिवत अधिग्रहण किया गया था। उस समय प्रचलित दरों के अनुसार प्रभावित भूमि स्वामियों को मुआवजा भी प्रदान किया गया था। वर्तमान में रेलवे को इस भूमि की आवश्यकता है। इसलिए रेलवे एवं आरपीएफ की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर वहां बने मकानों में रहने वाले लोगों को समझाइश दी है। उन्हें शीघ्र ही मकान खाली करने की हिदायत दी गई है, ताकि रेलवे विभाग अपनी आगामी विकास एवं निर्माण संबंधी कार्रवाई कर सके।- विनोद शर्मा, अधीक्षक रेलवे स्टेशन
Updated on:
12 Aug 2026 04:57 pm
Published on:
12 Aug 2026 04:57 pm
