
फतेहपुर (सीकर). प्रदेशभर में कार्यरत प्रेरकों का अनुबंध 30 सितंबर को समाप्त हो गया। केन्द्र सरकार के अनुबंध नहीं बढ़ाए जाने के बाद एक अक्टूबर से प्रदेश के 17 हजार प्रेरक बेरोजगार हो गए। इससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया।
गौरतलब है साक्षर भारत अभियान के तहत वर्ष 2012 में प्रदेश में सभी ग्राम पंचायतों पर दो-दो प्रेरकों को अस्थाई तौर पर अनुबंध पर नियुक्त किया गया था। इसके बाद प्रेरक न्यूनतम मजदूरी के बराबर मानदेय देने को लेकर हाईकोर्ट में चले गए थे। हाईकोर्ट ने 2014 में केन्द्र सरकार को न्यूनतम मजदूरी के बराबर राशि देने का आदेश दिया।
केन्द्र सरकार उक्त मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट से फैसला आना अभी बाकी है। साक्षर भारत अभियान केन्द्र सरकार ने पांच वर्ष के लिए शुरू किया था, अभियान 31 मार्च 2017 को खत्म हो गया। इसके बाद राज्य सरकार ने केन्द्र से अनुबंध बढ़ाने का आग्रह किया था। इस पर केन्द्र सरकार ने छह माह के लिए अनुबंध बढ़ाने के आदेश दिए थे। अब 30 सितंबर अनुबंध खत्म हो गया है।
वाचनालय भी...
हर ग्राम पंचायत में महात्मा गांधी वाचनालय व पुस्तकालय बने हुए है। राज्य सरकार की ओर से मानदेय के 500 रुपए प्रतिमाह दिया जा रहा है। अब प्रेरकों का अनुबंध नहीं बढ़ाएं जाने के कारण अब महात्मा गांधी पुस्तकालय कौन खोलेगा यह तय नहीं है।
यह काम करते हैं प्रेरक
गांवों में साक्षरता के लिए प्रेरक अहम कड़ी है। साक्षरता बढ़ाने के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं। निरक्षर को साक्षर बनाने में योगदान देते है, वर्ष में दो बार बुनियादी साक्षरता परीक्षा को आयोजित कराते हैं।
विभाग ने दी जानकारीविभाग ने दी जानकारी
प्रेरकों का अनुबंध 30 सितम्बर को समाप्त हो गया है। निदेशालय के नए निर्देश मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। विभाग ने भी प्रेरकों को इस संबंध में जानकारी दे दी है।
राकेश लाटा, साक्षरता अधिकारी, सीकर
Updated on:
2 Oct 2017, 3:39 PM IST
Published on:
2 Oct 2017, 2:02 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.