
प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी
सीकर.
राजस्थान भाजपा में अनुशासन के भीष्म पितामह मदनलाल सैनी को भाजपा की कप्तानी मिलने के कई सियासी मायने है। तिवाड़ी व महरिया की मजबूत पकड़ वाले क्षेत्र माने जाने वाली शेखावाटी पर अब भाजपा ने बड़ा दांव खेला है। पहले राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कमान इसी की कवायद है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि ओबीसी वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने के लिए भाजपा ने यह राह अपनाई है। सैनी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे दूसरी वजह संघ परिवार और ईमानदार छवि का साधारण कार्यकर्ता होना भी है।
जातिगत चुनौती
शेखावाटी सहित अन्य क्षेत्रों में भाजपा से सैनी समाज काफी नाराज था। सीकर में तो सभापति की टिकट नहीं दिए जाने पर आलाकमान को शिकायत भी भेजी थी। ऐसे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के जरिए भी राजनैतिक निशाना साधने की तैयारी में है।
तिवाड़ी-महरिया मामले में ड्रेमेज कन्ट्रोल की कवायद
सांगानेर विधायक घनश्याम तिवाड़ी के भाजपा का दामन छोडऩे के बाद भाजपा ड्रेमेज कन्ट्रोल में जुटी है। तिवाड़ी का शेखावाटी में खासा प्रभाव है। इसलिए शेखावाटी में जनसंघ से जुड़े भाजपा पदाधिकारियों व संघ से जुड़े लोगों पर पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए सैनी का सहारा लिया गया है। वहीं पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया भी भाजपा का दामन छोडकर जा चुके है। ऐसे में सैनी के जरिए भाजपा महरिया की कमी को भी पूरा करना चाहती है।
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सादगी का रहा है हर कोई कायल
सैनी संगठन के जमीन से जुड़े कार्यकर्ता रहे है। सादगी पर हर कोई चर्चा करता रहा है। सैनी जयपुर से सीकर आते समय अधिकतर राजस्थान रोडवेज में सफर करते है। कई बाद कार्यकर्ताओं के आग्रह पर भी अपने निजी वाहन की बजाय सैनी बस में ही सफर पसंद करते रहे हैं।
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Updated on:
30 Jun 2018 09:22 am
Published on:
30 Jun 2018 09:22 am
