शहरवासियों को जाम की समस्या से राहत देने के लिए जिला प्रशासन ने सात साल में तीन बार बस स्टैण्डों को बदलने की कवायद की। लेकिन प्रशासन एक बार भी आमजन को राहत देने में सफल नहीं हो सका।
सबसे पहले तत्कालीन जिला कलक्टर मंजू राजपाल, एसएस सोहता व एलएन सोनी के समय बस स्टैण्डों के फेरबदल को लेकर कवायद हुई। तीन बस स्टैण्ड बदले भी गए। लेकिन इस बीच अधिकारियों का तबादला होने सहित अन्य कारणों से मामला ठंडे बस्ते में अटक गया। अभी बस संचालकों ने कई स्थानों पर तो मनमर्जी से बस स्टैण्ड बना रखे है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन कुछ बस स्टैण्डों को आबादी क्षेत्र से दूर करें तो जाम से कुछ राहत मिल सकती है।