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Rajasthan Election 2023: राजस्थान में मतदान प्रतिशत बढ़ने से इन हॉट सीटों ने पकड़ी हीट

Rajasthan Election 2023: शेखावाटी की हॉट सीट लक्ष्मणगढ़ व तारानगर ने मतदान के बाद हीट ज्यादा पकड़ ली है। इस बार हुए चुनावों में दोनों जगह मतदान के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं।

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सीकर

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Kirti Verma

Nov 27, 2023

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सचिन माथुर
Rajasthan election 2023 शेखावाटी की हॉट सीट लक्ष्मणगढ़ व तारानगर ने मतदान के बाद हीट ज्यादा पकड़ ली है। इस बार हुए चुनावों में दोनों जगह मतदान के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। लक्ष्मणगढ़ सीट पर 76.47 तो तारानगर में 82.30 फीसदी मतदान हुआ है। इसके चलते पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा व विधानसभा नेता प्रतिपक्ष राजेंद्रसिंह राठौड़ की हार- जीत के अलग- अलग कयास शुरू हो गए हैं। एंटी इन्कम्बेंसी तो कोई इसे प्रो इन्कम्बेंसी वेव के तौर पर देख रहा है। पर पिछले चुनावों का विश्लेषण करें तो मतदान प्रतिशत बढ़ऩा राजेंद्र राठौड़ के लिए फायदेमंद रहा है। वहीं, डोटासरा के लिए मतदान की बढ़त- घटत दोनों ही लाभदायक रही है। दोनों ही स्थितियों में उनके मत प्रतिशत के साथ जीत के अंतर का ग्राफ लगातार बढ़ा ही है।

डोटासरा मत प्रतिशत व जीत का अंतर बढ़ा
लक्ष्मणगढ़ के पिछले चुनावों के ट्रेंड के अनुसार मतदान प्रतिशत की घटत- बढ़त दोनों ही गोविंद सिंह डोटासरा के लिए फायदेमंद रही है। उनके मत प्रतिशत के साथ जीत का अंतर लगातार बढ़ा ही है। 2003 के चुनावों में लक्ष्मणगढ़ में 68.22 फीसदी मतदान होने पर भाजपा के केडी बाबर विधायक बने थे। 2008 में मतदान घटकर 65.93 फीसदी हुआ तो डोटासरा ने 24.70 फीसदी मत हासिल कर 34 वोटों से अपना पहला चुनाव जीता। 2013 में मतदान बढकऱ 75.07 फीसदी हुआ तो उनका मत प्रतिशत 34.32 फीसदी के साथ जीत का अंतर 10723 हो गया। 2018 में मतदान घटकर 74.28 फीसदी हुआ तो भी उनका मत प्रतिशत 57.78 फीसदी तक पहुंचा जो उनके लिए 22102 मतों से जिताने वाला साबित हुआ है।

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राठौड़ को मिला वोटिंग बढ़ने का फायदा
चुनावी आंकड़ों के अनुसार मतदान प्रतिशत बढऩा अब तक भाजपा के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ के पक्ष में रहा है। 1998 में चूरू में 72.56 फीसदी मतदान होने पर उन्होंने 52.56 फीसदी मत प्राप्त कर 6278 मतों से जीत दर्ज की थी। जबकि 2003 में मतदान घटकर 71.91 हुआ तो उनका मत प्रतिशत भी घटकर 48.55 फीसदी हो गया। हालांकि जीत का अंतर 7925 हो गया। इसी तरह चूरू में 2013 में मतदान फिर बढ़कऱ 78.77 फीसदी हुआ तो 6.66 फीसदी मतों की बढ़ोत्तरी के साथ वे 55.21 फीसदी मत हासिल कर 24002 मतों से जीते। वहीं, 2018 में मतदान घटकर 77.88 फीसदी हुआ तो फिर उनके मत प्रतिशत में 6.93 फीसदी की कमी के साथ जीत का अंतर 1850 रह गया।

तारानगर का ट्रेंड: मतदान बढऩे पर भाजपा को फायदा
पिछले चार चुनावों का ट्रेंड देखें तो यहां भी मतदान प्रतिशत बढऩा भाजपा व घटना कांग्रेस के लिए फायदेमंद रहा है। यहां 2003 में 74.82 फीसदी मतदान रहने पर कांग्रेस के डा. चंद्रशेखर बैद विजयी रहे थे। इसके बाद 2008 के चुनाव में मतदान बढकऱ 77.43 फीसदी होने पर राजेंद्र राठौड़ ने बैद को हराया तो 2013 में मत प्रतिशत फिर बढकऱ 77.71 प्रतिशत पहुंचा तो फिर भाजपा के प्रत्याशी जयनारायण पूनिया ने बैद को हराया। वहीं, 2018 के चुनाव में मत प्रतिशत घटकर 75.15 प्रतिशत हुआ तो तारानगर में फिर कांग्रेस के नरेंद्र बुडानिया ने भाजपा के नए नवेले प्रत्याशी राकेश जांगिड़ को हरा कर जीत का सेहरा अपने सिर पर बांधा।

मुकाबला कड़ा, तीन का इंतजार
फिलहाल लक्ष्मणगढ़ व तारानगर दोनों ही सीटों पर भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है। इसमें जीत का ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है। ऐसे में सबकी निगाहें तीन दिसंबर के चुनाव परिणाम पर टिक गई है।

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