
दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई करवाते विशेष शिक्षक। फोटो पत्रिका
Rajasthan : भारतीय पुनर्वास परिषद के कायदे देश के दो लाख से अधिक विद्यार्थियों की मुसीबत बढ़ा रहे हैं। दरअसल, भारतीय पुनर्वास परिषद की ओर से विशेष शिक्षा महाविद्यालयों में दाखिले के लिए जुलाई महीने में ऑनलाइन आवेदन भरवाए थे। परिषद ने दावा किया था कि छह अगस्त तक केन्द्रीयकृत व्यवस्था के तहत कॉलेज आवंटन की पहली सूची जारी कर दी जाएगी। अगस्त के आखिर तक विशेष शिक्षा महाविद्यालयों में डिप्लोमा के विद्यार्थियों की पढ़ाई शुरू होनी थी।
अब तक तक पुनर्वास परिषद की ओर से सूची जारी नहीं होने से इन पाठ्यक्रमों में आवेदन करने वाले युवाओं का कॅरियर उलझा हुआ है। विद्यार्थियों की पीड़ा यह है कि यूजी व बीएसटीसी आदि पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। यदि अब परिषद की ओर से इस सत्र को शून्य सत्र घोषित कर दिया तो उनकी साल खराब हो सकती है। दूसरी तरफ अब सूची आने पर भी एक महीने तक देशभर के एक हजार महाविद्यालयों में दाखिले पूरे होंगे। ऐसे में शिक्षा सत्र अक्टूबर से पहले शुरू होने की संभावना नहीं है। इससे आगामी परीक्षाएं भी प्रभावित होंगी।
बीएसटीसी में भी नहीं ले सकते दाखिला
नीतू कुमारी ने बताया कि विशेष शिक्षा में कॅरियर की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए आवेदन किया था। इससे पहले बीएसटीसी पाठ्यक्रम के लिए आवेदन कर चुकी थी। लेकिन मन में विशेष शिक्षा में डिप्लोमा करने का बनाया। इसलिए बीएसटीसी में नंबर आने के बाद भी कॉलेज में फीस जमा नहीं कराई। इधर, पुनर्वास परिषद ने अब तक चयनित विद्यार्थियों की सूची जारी नहीं की है। जबकि ज्यादातर पाठ्यक्रमों में दाखिले की दौड़ पूरी हो चुकी है।
नियमित स्नातक से भी चूके
छात्र सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि विशेष शिक्षा के पाठ्यक्रम में दाखिले की वजह से स्नातक के लिए सरकारी कॉलेज में सीट अलॉट होने के बाद भी दाखिला नहीं लिया। यदि अब परिषद की ओर से इस सत्र को शून्य घोषित कर दिया तो पूरा साल ही खराब हो जाएगा। परिषद को विद्यार्थियों की चिंता को देखते हुए कोई आम सूचना तो जारी करनी चाहिए।
विशेष शिक्षा के पाठ्यक्रमों में क्रेज की वजह हर शिक्षक भर्ती में पद मिलना है। राजस्थान के अलावा दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश में लगातार विशेष शिक्षकों की भर्ती हुई है। हालांकि नौकरी के लिए बेरोजगारों का ग्राफ भी बढ़ रहा है। वर्ष 2018 तक जहां एक पद के लिए दो से तीन बेरोजगार कोशिश करते हैं, लेकिन एक पद के लिए औसतन छह से नौ बेरोजगार नौकरी के लिए प्रयासरत है।
भारतीय पुनर्वास परिषद की ओर से अब तक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए चयनित विद्यार्थियों की सूची जारी नहीं करने से युवाओं में कॅरियर को लेकर उलझन है। परिषद से लगातार पत्राचार करने के बाद भी कोई जवाब नहीं आया है। सत्र देरी से शुरू होने से देशभर की एक हजार से अधिक संस्थाओं के साथ आवेदन करने वाले युवाओं की मुसीबत बढ़ रही है।
सुदीप गोयल, विशेष शिक्षा मामलों के जानकार
Published on:
27 Aug 2025 02:33 pm
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