6 सितंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नक्सलियों के हमले में शेखावाटी का लाल लोकेन्द्र शहीद, गांव में छाई शोक की लहर

https://www.patrika.com/rajasthan-news/
2 min read
Google source verification

सीकर

image

kamlesh sharma

Jul 15, 2018

 jawan Lokendra

मूंडरू। सीकर जिले के गांव नाथूसर का लाडला छतीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर के प्रतापपुर थाना क्षेत्र के मोहला जंगल में नक्सलियों के हमले में शहीद हो गए। रविवार सुबह जवान सर्चिंग पर निकले थे। उसी दौरान नक्सलियों ने उन पर हमला किया कर दिया। इस हमले में बीएसएफ की 175 बटालियन के नाथूसर निवासी 25 वर्षीय लोकेंद्र सिंह शेखावत व पंजाब निवासी मुख्तयार सिंह शहीद हो गए हैं।

जवान सुबह करीब चार बजे सर्चिंग पर मोहला से प्रतापपुर की ओर निकले थे। लौटते समय वो एंबुश में फंस गए और बरकोट गांव की ओर से नक्सलियों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। शहीद लोकेन्द्र सिंह की पार्थिव देह सोमवार को गांव पहुंचेगी। उनका अंतिम संस्कार भी सोमवार को किया जाएगा। लोकेन्द्र सिंह मई 2011 में बीएसएफ में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुआ था।

वर्तमान में वह छतीसगढ़ के नक्सली क्षेत्र में बीएसएफ की 175 वीं बटालियन में कांस्टेबल के पद पर तैनात था। लोकेंद्र की तीन साल पहले ही परबतसर के आसरवा गांव की अन्नूकंवर से शादी हुई थी।


लोकेंद्र के बेटे के जडूला उत्सव की तैयारियां रोकी
लोकेन्द्र सिंह के घर पर उसके छह माह के बेटे दक्ष प्रताप सिंह के जडुले उत्सव को लेकर तैयारियां चल रही थी। घर परिवार के लोग घर पर मिठाइयां बनाकर मऊ के भैरव जी मन्दिर में जडुला उतारने जाने वाले ही थे की परिवारजनों को लोकेन्द्र सिंह के शहीद होने का समाचार मिलते ही सारी खुशियां ढेर हो गई और घर का माहौल ग़मगीन हो गया।

हालांकि देर शाम तक लोकेन्द्र की माता कैलाश कंवर, पिता महेंद्र सिंह व पत्नी को लोकेन्द्र के शहीद होने की सूचना नहीं दी गई। उन्हें लोकेन्द्र के पैर में गोली लगने से घायल होने का समाचार ही दिया गया।

तीन साल पहले हुई थी शादी
लोकेन्द्र सिंह की तीन साल पहले परबतसर नागौर के आसरवा गांव की अन्नू कंवर के साथ शादी हुई थी। लोकेन्द्र सिंह के एक बड़ा भाई कुलदीप है जो निजी वाहन चालक है। पिता घर पर खेती का काम करते है। लोकेन्द्र की माता कैलाश कंवर करीब एक साल से असाध्य बीमारी से ग्रसित है। जिनका बीकानेर के अस्पताल से इलाज चल रहा है।

गांव का पहला शहीद
भारतीय सेना व अद्र्ध सैनिक बलों में गांव के सैकड़ों जवान विभिन्न पदों पर सेवाएं देकर सेवानिवृत हो चुके हैं वही सैकड़ों युवा सेवारत हैं। उनमे से बहुत से सैनिक भारत-चाइना, भारत पाक व कारगिल की लड़ाइयां लड़ चुके हैं, लेकिन कभी कोई शहीद नहीं हुआ। लोकेंद्र गांव का पहला शहीद बेटा है।