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VIDEO : बैंक मैनेजर व इंजीनियर दूल्हों ने शेखावाटी की जुड़वा बहनों की शादी में इस बात से साफ कर दिया इनकार

एक बैंक मैनेजर व एक इंजीनियर युवक ने सोमवार को अपनी शादी में दहेज नहीं लेकर सीकर में मिसाल कायम की है।

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सीकर. एक बैंक मैनेजर व एक इंजीनियर दोनों युवकों ने सोमवार को अपनी शादी में दहेज नहीं लेकर मिसाल कायम की है। दोनों का मानना था कि दहेज जैसी सामाजिक बुराई व कुप्रथा को त्यागने के लिए युवाओं को ही शुरूआत करनी होगी।

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ताकि शादी में होने वाली फिजूलखर्ची को रोका जा सके और दिखावे की विचार धारा से दूरी बनाई जा सके। इधर, दुल्हनों का मानना था कि बिना दहेज की शादी होने से बेटियों को संरक्षण मिलेगा। खर्चा नहीं होने पर बेटियों को बोझ समझने वाले माता-पिता भी राहत महसूस कर सकेंगे।

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जानकारी के अनुसार सर्किट हाउस के पास एक निजी विवाह स्थल पर झाझड़ के अरविंद सैनी की दो बेटियां दीक्षा व दामिनी की शादी थी। दोनों बेटियां एमबीए है। इनके साथ रतनगढ़ के प्रमेंद्र जो कि, बैंक मैनेजर हैं और दूसरे अलवर के गोविंद जो कि, पुणे में इंजीनियर हैं।

इन दोनों की शादी दीक्षा और दामिनी के साथ हुई थी। दोनों दूल्हों के पिता महावीर व चिरंजीलाल का कहना था कि असली दहेज तो बेटियां व बहुएं ही होती हैं। जो, परिवार को जोड़ कर ऊंचाइयों तक ले जाने में सक्षम होती हैं।

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इंसान पैसा तो कभी भी कमा सकता है। लेकिन, अच्छे संस्कार व जागरूक बहू-बेटी हो तो आगे आने वाली पीढ़ी भी संवर जाती है। दहेज नहीं लेकर इस परंपरा को दोनों परिवारों ने आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया है।

दुल्हनों के पिता अरविंद स्वयं रेलवे में चिकित्सा अधिकारी हैं। इनके अनुसार बिना दहेज की शादी कर परिवार में एक नई शुरुआत की गई है। यदि सभी ऐसा करने लगे तो समाज की इस कुप्रथा को मिलकर दूर किया जा सकता है। इतने बड़े पदों पर होने के बावजूद दोनों दूल्हों द्वारा दहेज में एक फूटी कौड़ी नहीं लेना आस-पास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। दूल्हन पक्ष के रिश्तेदार सांवरमल सैनी के अनुसार इस अनूठे संकल्प को आगे बढ़ाने का प्रयास समाज मिलकर करेगा।

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दोनों दुल्हन दीक्षा और दामिनी एक साथ जुड़वा पैदा हुई। इसके बाद रतलाम कॉलेज में एमबीए के दौरान दोनों ने एक साथ ब्यूटी क्वीन का खिताब हासिल किया। सोमवार को दोनों बहनों की शादी भी एक साथ हुई। इनमें दामिनी का कहना था कि यदि दहेज के लालची लोग बहू में बेटी को देखने लग जाए तो दहेज रूपी इस गंभीर समस्या को खत्म किया जा सकता है। फिर किसी घर में न तो कोई बहू जलेगी और न ही दहेज हत्या जैसे अपराध बढ़ेंगे।