26 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बंदर के बच्चे का सिर तांबे के लोटे में फंसा, तलाश में जुटी नगर पालिका और वन विभाग की टीम

सिरोही के बाद मंडार में भी बंदर के बच्चे के सिर में लोटा फंसने का मामला सामने आया है। नगर पालिका और वन विभाग की टीमें दिनभर तलाश में जुटीं, लेकिन बंदरों का झुंड ओझल हो गया।

2 min read
Google source verification
Baby monkey head stuck in pot rescue teams search in Mandar starving for 2 days in heat

सिरोही के बाद अब मंडार में बंदर के बच्चे का सिर तांबे के लोटे में फंसा (पत्रिका फोटो)

मंडार (सिरोही): सिरोही शहर में करीब बीस दिन पहले जिस बंदर के बच्चे के सिर में लोटा फंसने की घटना ने लोगों को हैरान कर दिया था। वैसा ही नजारा शुक्रवार को मंडार में भी देखने को मिला। इस बार भी मासूम बंदर का बच्चा पानी पीने की कोशिश में तांबे के लोटे में सिर फंसा बैठा।

मंडार के मेनिवाले रास्ते पर शुक्रवार दोपहर बाद लोगों ने देखा कि एक बंदर का बच्चा पानी पीने की कोशिश में तांबे के लोटे में सिर फंसा बैठा है। मां बंदरिया अपने बच्चे को लेकर इधर-उधर दौड़ रही थी और लोग इस दर्दनाक दृश्य को मोबाइल कैमरों में कैद कर रहे थे।

घटना की खबर मिलते ही नगर पालिका, वन विभाग और प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हुए। जीवदया प्रेमियों ने बच्चे को पकड़कर लोटा निकालने का प्रयास किया, लेकिन मां की ममता ने किसी को पास नहीं आने दिया। अंधेरा होते ही बंदरिया और बच्चा नजरों से ओझल हो गए।

सुबह फिर दिखे, पर लोटा जस का तस

शनिवार सुबह एक मकान के छज्जे पर बंदरिया और बच्चा फिर दिखाई दिए। बच्चे के सिर में अब भी लोटा फंसा हुआ था। बताया गया कि बच्चा दो दिन से भूखा-प्यासा है। भीषण गर्मी में उसकी हालत नाजुक हो सकती है।

टीमों की तलाश जारी

नगर पालिका स्वास्थ्य निरीक्षक श्याम जनवा की अगुआई में तीन नगर पालिका कर्मी और तीन वन कर्मियों की टीम सुबह से ही क्षेत्र के कुओं और गलियों में तलाश में जुटी रही। लेकिन समाचार लिखे जाने तक बंदर और बच्चा नजर नहीं आए।

नायब तहसीलदार जब्बर सिंह देवड़ा ने बताया कि सूचना मिलते ही वन विभाग और नगर पालिका को अलर्ट कर दिया गया था। पादर वन चौकी के देवीलाल ने कहा कि बंदर को पकड़ने की जिम्मेदारी पंचायत या नगर पालिका की है।

हालांकि, वनकर्मी भी मदद के लिए जुटे हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त कोशिशें जल्द ही इस नन्हे बंदर को संकट से बाहर निकालेंगी।