इसके बाद भी टोल वसूली चालू रखी गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं सिरोही प्रभारी मंत्री महेंद्र चौधरी को भी कई बार ज्ञापन दिया था, लेकिन सरकार की ओर टोल कर्मियों की मिली भगत के कारण बंद नहीं हुआ था। तत्कालीन राजस्थान सरकार और ठेकेदार की मिली भगत से न्यायालय में सही जवाब पेश नहीं किया जा रहा था। इस कारण 2 साल में करीब 20 बार कोर्ट का स्टे लाकर टोल वसूली की जा रही थी। अब जाकर राहत मिली है।