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VIDEO: मतदान का जज्बा ऐसा कि पांच किलोमीटर पहाड़ी से पैदल आते है

- इडरमाल ग्रामीणों की व्यथा
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आबूरोड़. प्रदेश में सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं का संचालन कर ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं का ढिढ़ोरा पीटा जा रहा है, लेकिन आबूरोड ब्लॉक के भाखर क्षेत्र में आज भी ऐसे में गांव है, जहां आजादी के बाद आज भी ग्रामीण विकास की बाट जो रहे है। सूरपगला के इडरमाल को विकास की बात तो दूर राजनेता मतदान के लिए आने जाने के लिए सीमेंट सड़क की सौगात तक नहीं दिला सके। ऐसे में लोकतंत्र के हवन में आहूति देने से पहले मतदाताओं को करीब चार से पांच किलोमीटर पहाड़ी के उबड़ खाबड़ रास्तों से पैदल आना पड़ेगा। ग्रामीणों के अनुसार गांव के लिए एकमात्र उपलब्धि यहां छोटा सा स्कूल है, और नदी से थोड़ी दूर तक सीमेंट सड़क बनाई है। विकास एवं सुविधाओं से तो यह गांव कोसों दूर है। राजनेताओं के कोरे आश्वासन की बानगी तो लम्बे समय से की जा रही सड़क निर्माण तथा बिजली की मांग भी पूरी नहीं हुई है। इडरमाल पंचायत मुख्यालय से आबूरोड से करीब १४ किलोमीटर दूर जंगल तथा पहाड़ी क्षेत्र में बसा हुआ है। सूरपगला ये यहां के लिए आवागमन होता है। गांव तक पहुंच की सड़क भी सही नहीं है, डामर सड़क देखने के लिए ग्रामीणों को पांच किलोमीटर पैदल चलता पड़ता है, वहीं रास्ते में जंगल भी पड़ता है, जिससे लोगों में डर बना रहता है। इस गांव का मतदान केन्द्र राजकीय माध्यमिक विद्यालय सूरपगला है, जो गांव से करीब ४ से ५ किलोमीटर की दूरी पर पड़ता है। ऐसे में गांव के करीब दौ सौ से ज्यादा मतदाताओं को मत डालने के लिए वहां तक पैदल ही जाना पड़ता है।
सुविधा सिर्फ विद्यालय की
सरकार के नाम से इस गांव को सिर्फ एक शिक्षक वाली प्राथमिक विद्यालय की सुविधा मिली है। राशन लेना हो या सरकार काम हो तो पांच किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।
यह समस्या सबसे बढ़ी
विजाराम गरासिया ने बताया कि ग्रामीणों के लिए सबसे बढ़ी समस्या तब होती है। जब कोई गंभीर रुप से बीमार पड़ जाए या कोई गर्भवति महिला को अस्पताल ले जाना हो। वाहन सुविधा नहीं होने के कारण ऐसी विकट परिस्थिति में बीमार को झोली में डालकर अन्य लोगों के सहारे से लाकर सूरपगला तक लाते है, उसके बाद उसका उपचार होता है।
मिलता है सिर्फ आश्वासन
केवीदेवी ने बताया कि प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से लम्बे समय से यहां मूलभूत सुविधा की मांग कर रहे हैं, पर सुनवाई नहीं हुई। चुनावों के दौरान नेता आते है और सुविधाएं देने का आश्वासन देते है, लेकिन बाद में मुडकर नहीं देखते है।