सरकारें जनता के द्वारा और जनता के लिए चुनी जाती हैं। आदर्श सूत्र है। इसे जपा ज्यादा जाता है। अमल में कम। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकारों के दो वर्ष पूरे हुए। तीनों राज्यों में लगभग 17 करोड़ की आबादी है। इन्हें इंतजार है विकास का। सरकारों के दावे कागजों पर लहराते दिखते हैं। जमीन पर सूखा पड़ा होता है। आयोजन कर सरकारें सफलता का बखान करती हैं। पर जनता के ख्वाब कब पूरे होंगे। शायद उसे तो पांच साल बाद ही याद किया जाएगा। तीनों ही सरकारें चालीस फीसदी पारी खेल चुकी हैं। अब तक जनता से किए वादों में कितने पूरे हुए, कितने बाकी हैं? जनता को इंतजार है 'विकास' के महानारे का। कब पूरा होता नजर आएगा या फिर.....