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Jaipur: राजस्थान विधानसभा में जनता के 2,000 सवालों के जवाब आज भी गायब, बजट सत्र से पहले खुली पोल

Responses from 13 departments Pending: जयपुर। विधानसभा सचिवालय की ओर से बार-बार ध्यान दिलाने के बावजूद विधानसभा सत्रों में सवालों के सरकारी महकमों से मिलने वाले जवाबों में लेटलतीफी का दौर जारी है।

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पत्रिका फाइल फोटो

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Responses from 13 departments Pending: जयपुर। विधानसभा सचिवालय की ओर से बार-बार ध्यान दिलाने के बावजूद विधानसभा सत्रों में सवालों के सरकारी महकमों से मिलने वाले जवाबों में लेटलतीफी का दौर जारी है। यह तो तब है जब हर बार की तरह इस बार भी विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी आइएएस अफसरों को बुलाकर फटकार लगा चुके हैं। अब बजट सत्र इस माह के अंत में शुरू होने जा रहा है और सच यह है कि आज भी इस सरकार के पहले सत्र के भी सभी प्रश्नों के जवाब नहीं आ पाए हैं।

हर सत्र में चल रही पेंडेंसी

नियमानुसार सत्र समाप्ति के बाद एक माह के अंदर सभी प्रश्नों के जवाब दिए जाने चाहिए, लेकिन सिर्फ प्रश्न ही नहीं, ध्यानाकर्षण, विशेष उल्लेख प्रस्ताव व सरकारी आश्वासन के जवाब भी समय पर नहीं आ रहे। पहले सत्र से लेकर पिछले साल तक कुल चार सत्र इस सरकार के पूरे हो चुके हैं और हर सत्र में पेंडेंसी चल रही है। करीब 59 विभाग ऐसे हैं, जो समय पर प्रश्नों के जवाब नहीं दे रहे। पिछले दिनों हुई बैठक में सामने आया था कि 2 हजार से ज्यादा प्रश्नों के जवाब लंबित चल रहे हैं।

ये विभाग बरत रहे सबसे ज्यादा लापरवाही

जो विभाग प्रश्नों का समय पर जवाब नहीं दे रहे उनमें पहले नंबर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग है। इसके बाद शिक्षा, स्वायत्त शासन, राजस्व, युवा मामले एवं खेल, नगरीय विकास एवं आवासन, कार्मिक, ऊर्जा, पंचायती राज, खान एवं पेट्रोलियम, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, उद्योग और गृह विभाग में प्रश्नों की सबसे ज्यादा पेंडेंसी है।

2-4 प्रश्न लगे, फिर भी नहीं दिए गए जवाब

विधानसभा में इस सरकार के तीसरे सत्र में जल उपयोगिता से जुड़ा एक, उद्यानिकी से जुड़े दो, मंत्रिमंडल सचिवालय से जुड़े सात प्रश्न लगाए गए थे। स्पीकर ने जिस दिन बैठक ली थी, उस दिन तक इन विभागों ने एक भी प्रश्न का जवाब नहीं दिया। इसी तरह चौथे सत्र में इंदिरा गांधी नहर, निर्वाचन, नीति निर्धारण, भू-संरक्षण, मंत्रिमंडल सचिवालय, राजकीय उपक्रम विभाग से जुड़े 1-1 और सूचना एवं जनसंपर्क से जुड़े 3 प्रश्न लगाए गए थे। किसी ने भी एक भी प्रश्न का जवाब नहीं दिया।

बजट सत्र में लगते हैं सबसे ज्यादा प्रश्न

राज्य विधानसभा के आम तौर पर साल में दो सत्र होते हैं। एक बजट सत्र और दूसरा मानसून सत्र। बजट सत्र सबसे लंबा चलता है और इस दौरान सात से आठ हजार प्रश्न लगते हैं। मानसून सत्र छोटा होता है और इसमें प्रश्न भी कम लगते हैं। इस माह के अंत में बजट सत्र आएगा, जिसके एक माह तक चलने के आसार हैं। ऐसे में यदि पुराने सत्रों में लगे प्रश्नों के जवाब ही नहीं आए तो प्रश्नों के जवाब की पेंडेंसी और बढ़ जाएगी।