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IOA Elections : भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव में पीटी उषा ने रचा इतिहास, बनीं पहली महिला अध्यक्ष

भारत की लीजेंड एथलीट पीटी ऊषा ने शनिवार को भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव में इतिहास रच दिया है। पीटी उषा आईओए की पहली महिला अध्यक्ष चुनी गई हैं। इसके साथ ही पीटी उषा ने 82 साल पुराना एक और रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वह 1960 के बाद पहली ऐसी आईओए अध्यक्ष हैं, जो पूर्व खिलाड़ी हैं। उनसे पूर्व महाराजा यादविंदर सिंह (खिलाड़ी) ऐसे अध्यक्ष रह चुके थे।

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भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव में पीटी उषा ने रचा इतिहास, बनीं पहली महिला अध्यक्ष।

भारत की उड़न परी के नाम से मशहूर एथलीट पीटी ऊषा ने आज शनिवार को भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव में इतिहास रच दिया है। पीटी उषा आईओए की पहली महिला अध्यक्ष चुनी गई हैं। आईओए के चुनाव में उन्हें निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित किया गया है। इसके साथ ही पीटी उषा ने 82 साल पुराना एक और रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वह 1960 के बाद पहली ऐसी आईओए अध्यक्ष हैं, जो पूर्व खिलाड़ी हैं। उनसे पूर्व महाराजा यादविंदर सिंह (खिलाड़ी) ऐसे अध्यक्ष रह चुके थे। भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव उच्चतम न्यायालय की ओर से नियुक्त किए गए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीध नागेश्वर राव की देखरेख में हुए हैं।

यहां बता दें महान एथलीट पीटी उषा के नाम एशियाई खेलों में कुल 11 पदक हैं, जिनमें चार गाेल्ड मेडल तो सात सिल्वर मेडल शामिल हैं। उन्होंने ये पदक 1982, 1986, 1990 और 1994 के एशियाई खेलों में जीते थे। इसके साथ ही उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में भी कुल 23 पदक जीते हैं, जिनमें 14 गोल्ड मेडल, 6 सिल्वर मेडल और 3 ब्रांज मेडल शामिल हैं। 58 वर्षीय पीटी उषा 1984 के ओलंपिक में 400 मीटर की बाधा दौड़ के फाइनल में चौथे पायदान पर रही थीं।

आईओए गुटीय सियासी संकट भी खत्म

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीध नागेश्वर राव की देखरेख में संपन्न हुए भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव में पीटी उषा के अध्यक्ष बनने से आईओए में पैदा हुआ गुटीय सियासी संकट भी खत्म हो गया है। बता दें कि इंटरनेशनल ओलंपिक समिति ने इस महीने चुनाव नहीं कराने की स्थिति में आईओए को निलंबित करने की चेतावनी जारी की थी। दरअसल, ये चुनाव दिसंबर 2021 में होने थे, लेकिन गुटीय राजनीति के कारण संपन्न नहीं हो पा रहे थे।

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निर्विरोध चुना जाना तय था

पीटी उषा का अध्यक्ष चुना जाना नवंबर में ही तय हो गया था, क्योंकि अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने वाली वह एकमात्र उम्मीदवार थीं। किसी की तरफ से भी उनका विरोध नहीं किया गया था। उन्हें जुलाई में भाजपा ने राज्यसभा के लिए नामित किया था। इसके बाद से ही ‘उड़न परी’ के नाम से मशहूर पीटी उषा को भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर देखा जा रहा था।

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