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जब 1964 में भारतीय हॉकी टीम ने टोक्यो में पाकिस्तान को हराया था फाइनल में

एक बार फिर से टोक्यो में ओलंपिक होने जा रहे हैं। 90 वर्षीय चरणजीत ने भारतीय महिला और पुरूष दोनों टीमों को शुभकामनाएं दी और इतिहास दोहराने का आग्रह किया है।

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Olympics Hockey

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भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कोच ग्राहम रीड कोरोना महामारी के बीच टीम की मानसिक दृढ़ता के कायल हैं। उनका कहना है कि चार दशक बाद ओलिंपिक में पदक जीतने की तैयारी में जुटी टीम के लिए टोक्यो में यह सफलता की कुंजी साबित हो सकती है। टोक्यो में ही भारतीय हॉकी टीम ने 1964 में फाइनल में पाकितान को हराया था। वैसे भी जब भारत—पाकिस्तान की टीमें आमने—सामने होती हैं तो माहौल कुछ अलग ही होता है। टोक्यो में वर्ष 1964 में दोनों हॉकी टीमें फाइनल में आमने सामने थीं और तनाव इतना ज्यादा था कि अंपायरों को दखल देना पड़ा था। इसमें भारतीय हॉकी टीम ने पाकिस्तान को 1—0 से हराकर टोक्यो ओलंपिक 1964 में गोल्ड मेडल जीता था।

पूर्व कप्तान चरणजीत सिंह ने शेयर किया किस्सा
टोक्यो ओलंपिक 1964 के दौरान भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे चरणजीत सिंह ने इस मैच का किस्सा शेयर किया। इस फाइनल मैच में भारत के लिए मोहिंदर लाल ने विजयी गोल दागा था। वहीं गोलकीपर शंकर लक्ष्मण गोल रोकने के लिए पाकिस्तान के सामने दीवार की तरह खड़े थे। चरणजीत सिंह ने कहा कि आस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल और पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल काफी कठिन थे। फाइनल मैच में पाकिस्तान के साथ तनाव इतना बढ़ गया था कि अंपायरों को दखल देना पड़ा था। चरणजीत ने बताया कि उन्होंने अपनी टीम के खिलाड़ियों से विरोधी टीम से बात करके समय बर्बाद करने की बजाय खेल पर ध्यान देने के लिए कहा। चरणजीत ने बताया कि चुनौती कठिन थी लेकिन सब्र के साथ बेहतरीन प्रदर्शन करते हुुए एक गोल के साथ टीम इंडिया ने यह मैच जीता।

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लौटने पर जो स्वागत हुआ वह आज भी याद
चरणजीत ने कहा कि टोक्यो से लौटने के बाद एयरपोर्ट पर टीम का जो भव्य स्वागत हुआ, वह सभी के लिए यादगार पल था जो आज भी याद है। ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का यह सातवां गोल्ड मेडल था। भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में आस्ट्रेलिया को 3—1 से हराया था। वहीं पाकिस्तान के खिलाफ भारत का यह लगातार तीसरा ओलंपिक फाइनल था और टोक्यो में जीत भारत के नाम रही।

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भारतीय और महिला हॉकी टीम को दी शुभकामनाएं
अब एक बार फिर से टोक्यो में ओलंपिक होने जा रहे हैं। ऐसे में 90 वर्षीय चरणजीत ने भारतीय महिला और पुरूष दोनों टीमों को शुभकामनाएं दी और इतिहास दोहराने का आग्रह किया है। एक बयान में उन्होंने कहा कि वह भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों को टोक्यो ओलंपिक के लिए शुभकामना देते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि ओलंपिक में पदक जीतना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे देश में हॉकी को नई उम्मीद मिलेगी। उम्मीद है कि 1964 की तरह वे पदक लेकर लौटेंगे।