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32 साल का युवा बन गया 80 वर्ष का वृद्ध

'अरे संभालो इन्हें, आपके दादा जी हैं या पिता? राजकीय चिकित्सालय में भर्ती एक अति वृद्ध दिख रहे शख्स की देखभाल में लगे युवक से जब यह कहा गया
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श्री गंगानगर

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pawan uppal

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Updated: 23 Sep 2017, 7:15 AM IST

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32 साल का युवा बन गया 80 वर्ष का वृद्ध

श्रीगंगानगर.

'अरे संभालो इन्हें, आपके दादा जी हैं या पिता? राजकीय चिकित्सालय में भर्ती एक अति वृद्ध दिख रहे शख्स की देखभाल में लगे युवक से जब यह कहा गया तो वह नाराज हो गया और उसका जवाब सुनकर आसपास के लोग दंग रह गए। इस युवक ने बताया कि यह कोई वृद्ध नहीं, बल्कि उसका सगा भाई है। इसकी उम्र साढ़े बत्तीस वर्ष है, लेकिन निश्चित रूप से अस्सी वर्ष से अधिक लगने वाले कृशकाय तन और दुग्ध धवल बालों वाले इस शख्स को देखकर किसी को भी युवक की बात पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब युवक पवन गरुआ ने सप्रमाण सच्चाई सामने रखी तो विश्वास हुआ कि दुनिया में ऐसे विचित्र रोग भी हैं।

बुजुर्ग दिखने वाले इस व्यक्ति पालाराम की जन्मतिथि आधार कार्ड के अनुसार एक जनवरी 1985 है। चिकित्सकों के अनुसार यह विचित्र रोग है, जिसमें व्यक्ति आयु से कहीं अधिक बुजुर्ग दिखता है। यह रोगी करीब दो दिन पूर्व राजकीय चिकित्सालय के मेल मेडिकल वार्ड 'बीÓ के तेईस नंबर बैड पर भर्ती था। यह रोगी उपचार के लिए प्राय: यहां आता है। रोग के कारण बच्चों जैसा दिमाग होने से वह अपने मनोभावों को व्यक्त नहीं कर पा रहा था। उसकी बीमारी से श्रीगंगानगर और बीकानेर के डॉक्टर भी हैरान हैं। साथ आए लालगढ़ जाटान के युवक पवन ने बताया कि उसका भाई पालाराम जब पंद्रह-सोलह साल का था, तब इस रोग के लक्षण नजर आने लगे।

शरीर धीरे-धीरे वृद्धों जैसा होता गया। कई डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन पता नहीं चला कि रोग क्या है? अब 32 की उम्र तक आते-आते पालाराम पूरी तरह कमजोर हो चुका है। वह दूसरों की बात समझता है लेकिन खुद नहीं समझा सकता। पालाराम जब पांच-छह वर्ष का था, तब उसके पिता ओमप्रकाश का निधन हो गया। छोटे भाई पवन ने बीस साल बाद बीमारी का शिकार होने के बाद बड़े भाई को बच्चे की तरह संभाला। पालाराम को पांचवीं तक पढ़ाया भी गया, लेकिन उसे कोई पढ़ाई याद नहीं है।

इस रोग के कारण पालाराम को प्रति माह खून की कमी होती है और उसे 35-40 दिन बाद चार यूनिट खून चढ़ाना पड़ता है। इसके लिए लालगढ़ जाटान के युवा तत्पर रहते हैं और पालाराम के लिए हर माह रक्तदान कर राजकीय चिकित्सालय से बदले में रक्त लाकर उसे चढ़वाते हैं।


पालाराम का विचित्र रोग प्री-मैच्यौर एजिंग का मामला है जो दुर्लभ बीमारी है। इसमें बार-बार खून की कमी होती है और व्यक्ति समय से पहले वृद्ध हो जाता है जबकि बुद्धि बच्चों जैसी रह जाती है। इस रोग का पूरा अध्ययन कर इलाज की कोशिश करेंगे व विशेषज्ञ से राय लेंगेे।
अभी खून की कमी पूरी
कर दी गई है।
डॉ. रवींद्र गोदारा,
वरिष्ठ चिकित्सक, राजकीय चिकित्सालय, श्रीगंगानगर।

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