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Karwa Chauth 2025: ‘मेरी पत्नी ही मेरी भगवान…’, राजस्थान में इन 3 पत्नियों का गिफ्ट बन गया मिसाल, अपने-अपने पतियों को दे दिया जिंदगीभर का तोहफा

Karwa Chauth Special Story: इन तीनों पत्नी ने अपने पति को जिंदगीभर का नया तोहफा दे दिया। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि सच्चाई है, जिसमें पत्नी ने सिर्फ व्रत नहीं रखा, बल्कि जीवनदान भी दिया।

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श्री गंगानगर

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Akshita Deora

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कृष्ण चौहान

Oct 10, 2025

फोटो: पत्रिका

Wife Gave Gift By Kidney Transplant: करवा चौथ का व्रत सिर्फ चांद देखने और उपवास रखने तक सीमित नहीं है। यह उस प्रेम, त्याग और समर्पण का पर्व है, जो जीवन की सबसे कठिन घड़ी में रिश्तों की असली परिभाषा गढ़ता है। इस बार करवा चौथ पर श्रीगंगानगर की तीन महिलाओं ने ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने इस त्योहार को भावनाओं की नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। इन तीनों पत्नी ने अपने पति को जिंदगीभर का नया तोहफा दे दिया।

इन तीनों ने अपने पतियों की जान बचाने के लिए अपनी एक-एक किडनी दान दी। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि सच्चाई है, जिसमें पत्नी ने सिर्फ व्रत नहीं रखा, बल्कि जीवनदान भी दिया। इस करवा चौथ पर इन तीनों महिलाओं ने साबित कर दिया कि पत्नी सिर्फ जीवनसंगिनी नहीं, बल्कि जीवनदाता भी होती है। उनका साहस, प्रेम और समर्पण इस पर्व को एक नई परिभाषा देता है, जहां चांद से पहले पति पत्नी का पवित्र रिश्ता चमकता है।

दलवीर कौर: जब पत्नी बनी जीवन रक्षक

कृषि विभाग में सहायक निदेशक दलवीर कौर के पति सतवीर सिंह गिल की दोनों किडनी खराब हो गई। डॉक्टरों ने तत्काल ट्रांसप्लांट की सलाह दी। दलवीर ने बिना हिचक अपनी एक किडनी देने का फैसला लिया। 23 जुलाई 2024 को सफल ट्रांसप्लांट हुआ और आज दोनों स्वस्थ हैं। दलवीर कहती हैं, ‘अगर मैं नहीं देती तो कौन देता? यह मेरा पहला फर्ज था।’

कविता : फर्ज से बनी कुर्बानी की कविता

एटीसी श्रीकरणपुर में कार्यरत सुरेंद्र सिंह की हालत 2016 में बिगड़ने लगी। जांच में दोनों किडनी खराब पाई गईं। पत्नी कविता ने रक्त न मिलने की बाधा के बावजूद प्लाज्मा तकनीक से ट्रांसप्लांट करवाया। 6 जुलाई 2018 को सुरेंद्र को नई जिंदगी मिली। सुरेंद्र कहते हैं, “मेरी पत्नी ही मेरी भगवान हैं।”

सरिता: जब प्रेम ने दी संजीवनी

रामदेव कॉलोनी की सरिता ने अपने पति भारत भूषण को किडनी रोग से जूझते देखा। दिसंबर 2024 में हालत गंभीर हुई। परिवार में कई विकल्प थे, लेकिन सरिता ने कहा - ‘मैं ही दूंगी।’ खुद कमर दर्द से पीड़ित होते हुए भी उन्होंने जांचें करवाईं और 12 अप्रैल 2025 को सफल ट्रांसप्लांट हुआ। छह महीने बाद दोनों स्वस्थ हैं।