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श्रीगंगानगर.
बच्चों का जीवन लीलने वाले ब्लू गेम के अलावा भी और कई मोबाइल गेम्स बच्चों की मानसिक स्थिति पर असर डाल रहे हैं। मनोचिकित्सकों की मानें तो एेसे गेम्स खेलने से बच्चों में उसके किरदार में ढलने का खतरा बना रहता है। एेसे में बच्चों पर ध्यान देने की जरुरत है।
गेम्स के मकडज़ाल में फंस रहे मासूम
मोबाइल पर बच्चे व किशोर शिक्षाप्रद गेम्स की बजाय तेज रफ्तार से बाइक या कार चलाने गेम डाउनलोड कर खेल रहे हैं। इसके अलावा एेसे गेम्स में उनकी रूचि सबसे अधिक है, जिनमें गेम का मुख्य किरदार या हीरो तरह-तरह की गन चलाता है और सामने आने वाले हर व्यक्ति को मारता है। एेसे गेम्स में सबसे ज्यादा जीटीए गेम बच्चों व किशोर का चहेता गेम बना हुआ है। इसमें गेम का मुख्य किरदार पहले वाहनों की चोरी करता है और पुलिस से बचकर भागता है। वह पुलिसकर्मियों पर हमला कर देता है और लोगों को वाहन से कुचलता है। वह लोगों पर फायरिंग भी करता है। मनोचिकित्सक व पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एेसे गेम्स बच्चे व किशोरों के दिमाग पर विपरीत असर डाल रहे हैं। बच्चा व किशार जो गेम में करता है, वहीं सब हकीकत में भी करना चाहता है। इसमें तेज गति से साइकिल या बाइक आदि चलाना शामिल हैं।
परिजन बच्चों पर ध्यान दें
- बच्चे व किशोर मोबाइल पर ब्लू व्हेल गेम के साथ ही कई एेसे भी गेम खेल रहे हैं, जो उनकी मानसिक स्थिति पर प्रभाव डाल रहे हैं। बच्चे जैसा गेम खेलते हैं, उनके दिमाग पर वैसा ही असर पड़ता है। लंबे समय तक गेम खेलने वाले बच्चे गेम के किरदार की तरह ही खुद को भी महसूस करने लगते हैं। इसके लिए परिजनों को बच्चों की तरफ ध्यान देने की महत्ती आवश्यकता है।
डॉ. प्रेम अग्रवाल, मानसिक रोग विशेषज्ञ, राजकीय चिकित्सालय, श्रीगंगानगर।
Published on:
01 Oct 2017 09:29 pm
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