इस दौरान पटवारी रवि गोदारा ने परिवादी से खुद के लिए व तहसीलदार, गिरदावर के लिए 40 हजार रुपए मांगे, जिसमें बीस हजार रुपए इंतकाल से पहले और बीस हजार रुपए इंतकाल दर्ज होने के बाद देना तय हुआ। ब्यूरो टीम ने तीन अक्टूबर, 10 अक्टूबर व 11 अक्टूबर को सूरतगढ़ पहुंचकर ट्रेप करने के लिए जाल बिछाया, लेकिन आरोपित रवि गोदारा ने परिवादी का इंतकाल दर्ज नहीं कर आक्षेप अंकित कर कागज लौटा दिए। परिवादी पर शक होने पर रिश्वत की राशि नहीं ली। इस पर ट्रेप कार्रवाई ड्रोप कर दी गई। इसकी रिपोर्ट ब्यूरो मुख्यालय भेजी गई, जहां पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।