लालगढ़ जाटान. गांव में आवारा पशुओं की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। पशुपालक गाय के बछड़ों को पालने की बजाए उसके सार संभाल के बोझ से बचने के लिए उन्हें गलियों में आवारा छोड़ देते हैं। जो भूख से तड़पते बिलखते पॉलीथिन व अन्य कचरा खा लेते हैं तथा बीमार होकर प्राण त्याग देते हैं। इस तरह मरे हुए पशु सार्वजनिक स्थानों पर कई दिनों तक मृत पड़े रहते हैं तथा वहां पर कुत्तों द्वारा उसे खा लिया जाता है। इस मृत पशुओं को जब तक कुत्तों द्वारा आधा तक नहीं खाया जाता तब तक उठवाने की कोई भी व्यक्ति आवश्यकता महसूस नहीं करता है गली बदलकर निकल जाते हैं।