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जैन संतों के लिए त्याग, तपस्या और संयम ही सब कुछ

जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष किशनलाल डागलिया के अनुसार तेरापंथी जैन संतों के लिए त्याग, तपस्या और संयम ही सब कुछ है।
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श्री गंगानगर

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pawan uppal

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Updated: 13 Sep 2017, 6:55 AM IST

kishan lal

जैन संतों के लिए त्याग, तपस्या और संयम ही सब कुछ

श्रीगंगानगर.

जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष किशनलाल डागलिया के अनुसार तेरापंथी जैन संतों के लिए त्याग, तपस्या और संयम ही सब कुछ है। वे न कोई राशि रखते हैं और न उनके कोई आश्रम है। भोजन तक भिक्षा लेकर करते हैं। क्षेत्र के दौरे पर आए हुए डागलिया ने मंगलवार को 'राजस्थान पत्रिका' से बातचीत में कहा कि धर्म संघ में संस्कार निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। महासभा की देश में 538 एवं विदेश में 15 इकाइयां कार्यरत हैं। इस साल एक दर्जन राष्ट्रीय संस्कार निर्माण शिविर रखे जा चुके हैं, इनमें 1700 बच्चों ने भाग लिया है।

देश में 470 ज्ञानशालाओं के माध्यम से 18 हजार विद्यार्थी संस्कार प्राप्त कर रहे हैं। महासभा अध्यक्ष ने बताया कि वे संगठन की यात्रा पर हैं, श्रीगंगानगर में 448वीं इकाई की गोष्ठी में शामिल हुए हैं। डागलिया ने बताया कि तेरापंथ के आचार्यश्री महाश्रमण की अहिंसा यात्रा चल रही है। वे 40 हजार किलोमीटर से अधिक दूर की पदयात्रा कर चुके। नई दिल्ली से नवम्बर, 2014 में शुरू हुई अहिंसा यात्रा नेपाल, भूटान के अलावा देश के 17 राज्यों से गुजर चुकी है। धर्मसंघ के साधु-साध्वी, श्रमण-श्रमणी आदि प्रेक्षा ध्यान, अणुव्रत एवं जीवन विज्ञान के माध्यम से समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने में जुटे हुए हैं।


'बांटने से बढ़ता है सुख, घटता है दुख

महासभा के अध्यक्ष किशनलाल डागलिया ने मंगलवार को यहां समाज की गोष्ठी में आपसी मेलजोल पर जोर दिया। उनका कहना था कि बांटने से सुख बढ़ता है एवं दुख घटता है। महासभा के उपाध्यक्ष डालमचंद बैद, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य देवेंद्र बांठिया, आंचलिक समिति के अध्यक्ष भोजराज जैन, स्थानीय इकाई अध्यक्ष राकेश बोरड़, सचिव जोगेन्द्र जैन, उमा बांठिया, मंत्री राज सुराणा, शुभम नाहटा, वीरेंद बैद आदि बैठक में मौजूद थे। राकेश बोरड़ ने गतिविधियों का ब्यौरा दिया। डागलिया दौरे के अंतर्गत सूरतगढ़, रायसिंहनगर, पीलीबंगा, ढाबांझलार, संगरिया, लीलांवाली, हनुमानगढ़ आदि स्थानों पर गोष्ठी में शामिल हो चुके हैं।

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