
फाइल फोटो- पत्रिका
श्रीगंगानगर। उत्तर रेलवे के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में श्रीगंगानगर–बठिंडा रेलखंड पर मई माह से इलेक्ट्रिक इंजन वाली ट्रेनों का संचालन शुरू होने जा रहा है। इसके साथ ही करीब 127 किलोमीटर लंबा यह ट्रैक पूरी तरह से इलेक्ट्रिफाइड हो जाएगा और वर्षों से चली आ रही बठिंडा में इंजन बदलने की समस्या समाप्त हो जाएगी। इस कदम से क्षेत्र के रेल यातायात को नई गति मिलने की उम्मीद है और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा।
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इस रेलखंड पर इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है और सफल ट्रायल भी किए जा चुके हैं। हालांकि अबोहर–श्रीगंगानगर सेक्शन में पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं होने के कारण संचालन शुरू नहीं हो पा रहा था। अब बल्लूआना में बन रहा ट्रैक्शन सब स्टेशन (टीएसएस) अंतिम चरण में है और इसे 30 अप्रेल तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके शुरू होते ही इस रूट पर हाई पावर सप्लाई उपलब्ध हो जाएगी और मई से इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन संभव हो जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से पूरे सेक्शन की कार्यक्षमता में सुधार होगा।
जेडआरयूसीसी के पूर्व सदस्य भीम शर्मा के अनुसार इस सुविधा के शुरू होने से श्रीगंगानगर से अबोहर होते हुए दिल्ली, हरिद्वार और अन्य प्रमुख शहरों की ओर जाने वाली ट्रेनों को बठिंडा में इंजन बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे ट्रेनों का ठहराव कम होगा और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही ट्रेनों की समयपालन क्षमता भी बेहतर होगी।
इस परियोजना से यात्रियों को समय की बचत, बेहतर समयपालन और सुगम यात्रा का लाभ मिलेगा। बठिंडा में इंजन बदलने की आवश्यकता समाप्त होने से ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी। इलेक्ट्रिक संचालन से प्रदूषण घटेगा और ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी। इसके साथ ही रेलवे की परिचालन लागत में भी कमी आएगी, जिससे लंबे समय में आर्थिक लाभ होगा।
कुल रेलखंड: 127 किमी (श्रीगंगानगर–बठिंडा)
इलेक्ट्रिफिकेशन: कार्य पूर्ण, ट्रायल सफल
टीएसएस: बल्लूआना, 30 अप्रेल तक पूरा होने की संभावना
संचालन: मई 2026 से प्रस्तावित
प्रमुख लाभ: समय की बचत, बिना इंजन बदलाव संचालन
भविष्य: ईएमयू ट्रेनों के संचालन की संभावना
Published on:
09 Apr 2026 05:17 pm
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