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राजस्थान में इस हवाई पट्टी से बड़े विमान उड़ाने की तैयारी, क्षेत्र के युवाओं को भी मिलेगा पायलट बनने का मौका

Lalgarh Airstrip: हवाई पट्टी का विस्तार मौजूदा जगह पर ही होगा। इसके लिए राज्य सरकार ने 7.5 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। एयर स्ट्रिप और चारदीवारी सहित हवाई पट्टी पर यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

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Lalgarh airstrip

लालगढ़ हवाई पट्टी पर बड़े विमान उतारने की तैयारी (फोटो- एआई)

श्रीगंगानगर। लालगढ़ हवाई पट्टी के विस्तार के साथ राज्य सरकार इस हवाई पट्टी पर फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (एफटीओ) की स्थापना पर विचार कर रही है। एफटीओ की स्थापना से इस हवाई पट्टी पर पायलट ट्रेनिंग की सुविधा मिलेगी और भविष्य के पायलट तैयार होंगे। पायलट बनने के इच्छुक इलाके के युवाओं को प्रशिक्षण के लिए अभी दिल्ली, जयपुर या अन्य शहरों में जाकर प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार प्रदेश में हवाई सेवाओं के विस्तार के लिए राज्य सरकार एफटीओ की स्थापना पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस सूची में लालगढ़ हवाई पट्टी के अलावा सीकर, झुंझुनूं, चूरू, झालावाड़ और भीलवाड़ा की हवाई पट्टियां शामिल हैं। राज्य सरकार की योजना विमानन क्षेत्र के विकास और युवाओं की इस क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने की है। प्रदेश में ही स्थापित एफटीओ से विमान उड़ाने का प्रशिक्षण लेने वाले युवा पायलट इस जरूरत की पूर्ति करेंगे।

इसलिए किया गया चयन

श्रीगंगानगर इस समय मेडिकल शिक्षा का हब बन चुका है। जिले से बड़ी संख्या में युवा वर्क एवं स्टडी वीजा पर विदेशों में जाते हैं। किन्नू सहित कृषि उत्पाद की खरीद के लिए व्यापारियों का आना-जाना लगा रहता है। लालगढ़ हवाई पट्टी क्षेत्रीय हवाई संपर्क उड़ानों की योजना में शामिल हो जाती है तो इन सभी को सुविधा रहेगी।

7.5 करोड़ से होंगे निर्माण कार्य

हवाई पट्टी का विस्तार मौजूदा जगह पर ही होगा। इसके लिए राज्य सरकार ने साढ़े सात करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। एयर स्ट्रिप और चारदीवारी सहित हवाई पट्टी पर यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। हवाई पट्टी का विस्तार मौजूदा जगह पर करने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। वजह थी बड़े विमानों के टेक ऑफ के लिए मौजूदा हवाई पट्टी की लंबाई बढ़ाने के लिए आसपास जगह नहीं होना।

1600 मीटर लंबी होगी हवाई पट्टी

एयर स्ट्रीप की लंबाई 1300 मीटर से बढ़ाकर 1600 मीटर किए जाने पर इसे एटीआर 72-600 और एटीआर 42-600 की लैंडिंग और टेक ऑफ के लिए उपयुक्त माने जाने पर हवाई पट्टी का विस्तार मौजूदा जगह पर करने का निर्णय हुआ है। एयर स्ट्रिप की लंबाई 1600 मीटर करने के लिए मौजूदा हवाई पट्टी के पास 300 मीटर से अधिक जगह उपलब्ध है।

एटीआर विमानों के लिए टेक ऑफ की अनुमानित लंबाई

एटीआर 42-600

पचास सीट वाले इस मॉडल के लिए आमतौर पर लगभग 1,100 मीटर (3,600 फीट) की एयरस्ट्रीप लंबाई की आवश्यकता होती है। कुछ विशिष्ट मॉडलों और स्थितियों में यह थोड़ी कम या ज्यादा हो सकती है। एटीआर 42-600 को अधिकतम टेक-ऑफ भार और अंतरराष्ट्रीय मानक वातावरण में समुद्र तल पर 1,107 मीटर की एयर स्ट्रीप की आवश्यकता टेक ऑफ के लिए होती है।

एटीआर 72-600

70 सीट वाले इस मॉडल के लिए आमतौर पर लगभग 1,350 मीटर (4,430 फीट) लंबाई की एयरस्ट्रीप की आवश्यकता होती है। एटीआर 72-600 के लिए, बुनियादी टेक-ऑफ दूरी 1,333 मीटर है, जबकि कुछ विकल्पों में यह थोड़ी अधिक हो सकती है। उच्च ऊंचाई या उच्च तापमान जैसी स्थितियां टेक ऑफ दूरी को बढ़ा सकती हैं।

विस्तार से होगा यह फायदा

हवाई पट्टी पर यात्रियों को बीकानेर हवाई अड्डे जैसी सुविधा मिलने लगेगी। अभी इस हवाई पट्टी पर छोटे विमान ही उतर सकते हैं। विस्तार के बाद 50 से 70 सीट वाले बड़े विमान उड़ान भर सकेंगे। हवाई पट्टी का विस्तार होने के बाद यहां से जयपुर और दिल्ली के लिए हवाई सेवा शुरू होने से जिले के विकास पर भी असर पड़ेगा। भविष्य में अन्य बड़े शहरों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

यहां से पहले भी उड़ान भर चुके हैं विमान

श्रीगंगानगर में पहली बार हवाई सेवा 1960 में दिल्ली - श्रीगंगानगर के बीच सौ दिन चली। यह विमान सेवा ईगल एयरलाइंस ने शुरू की थी। दूसरी बार यह सेवा 2018 में सुप्रीम एयरलाइंस ने श्रीगंगानगर से जयपुर के बीच शुरू की। दस जुलाई 2018 को शुरू हुई विमान सेवा 3 अगस्त को विमान के रनवे पार कर दीवार से टकराने पर बंद हो गई।

इनका कहना है

एटीआर विमानों के लिए एयर स्ट्रिप की लंबाई 1600 मीटर करनी होगी। इसके लिए पश्चिम दिशा में छावनी की तरफ 300 मीटर जगह मिल जाएगी जिसे लेने के लिए भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके लिए अलग से राशि जारी करने के बारे में मुख्यमंत्री से बात हुई है। जो बजट जारी हुआ है, उससे एयर स्ट्रिप का निर्माण नए सिरे से होगा। यह काम साल भर में पूरा होने की उम्मीद है। -गुरवीरसिंह बराड़, विधायक, सादुलशहर


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