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Sriganganagar Assembly Seat: पिछले चुनाव में निर्दलीय ने मारी थी बाजी, कांग्रेस के लिए चुनौती है ये सीट

विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो चुकी है। गंगानगर सीट पर प्रत्याशियों की तस्वीर अभी तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।

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श्रीगंगानगर। विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो चुकी है। गंगानगर सीट पर प्रत्याशियों की तस्वीर अभी तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। सभी राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के ताल ठोकने के बाद समीकरण बनने लगेंगे। इतना तय है कि इस बार भी यहां के जागरूक मतदाता निष्पक्ष निर्णय करने में संकोच नहीं करेंगे। जिला मुख्यालय की इस सीट पर राजनीतिक दलों से ज्यादा उम्मीदवार के चेहरे पर मतदाताओें ने अपनी मुहर लगाई है। पंजाबी बहुल होने के बावजूद यहां जात पांत का कार्ड कभी हावी नहीं हुआ। यही वजह है कि जनता के बीच रहने वाले प्रत्याशियों को हमेशा आशीर्वाद मिला है। पंद्रहवीं विधानसभा के गठन तक 11 बार गैर कांग्रेसी उम्मीदवार जीतकर विधानसभा में पहुंचे। इसमें निर्दलीय, सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, जनता दल और जमींदारा पार्टी के प्रत्याशी शामिल हैं। कांग्रेस के लिए यह सीट हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है।

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चार बार जीते थे राधेश्याम
इस सीट पर राधेश्याम तीन बार कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर और एक बार भाजपा उम्मीदवार बनकर कुल चार बार जीत चुके। अब वे राजनीति से सन्यास ले चुके हैं। वे पहली बार वर्ष 1980 में विधायक बने। इसके बाद वर्ष 1993 और वर्ष 1998 में कांग्रेस से टिकट लेकर चुनाव जीते, लेकिन वर्ष 2008 में कांग्रेस से टिकट कटी तो भाजपा का दामन थाम लिया और चुनाव जीत गए। वर्ष 2013 में भाजपा की टिकट पर हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2018 में भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा तो सिर्फ 2346 वोटों में सिमट गए।

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ये तीन चुनाव बने यादगार
गंगानगर विधानसभा चुनाव बनने पर यहां से 1952 में कांग्रेस के मोतीराम विधायक बने थे। उन्होंने निर्दलीय चेतराम को हराया था। वर्ष 1993 के चुनाव में कांग्रेस के राधेश्याम गंगानगर जीते थे, तब यहां से भैरोसिंह शेखावत को हार का सामना करना पड़ा था। वे तीसरे स्थान पर रहे। वर्ष 2013 के चुनाव में पहली बार महिला उम्मीदवार कामिनी जिन्दल ने जीत दर्ज की थी। जमींदारा पार्टी की इस प्रत्याशी ने सबसे ज्यादा वोट 77,860 लेने का नया रिकॉर्ड बनाया। गैर कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में प्रोफेसर केदारनाथ शर्मा का इस सीट पर दबदबा रहा। शर्मा ने यहां से छह बार चुनाव जीतकर रिकार्ड बनाया। यह रिकॉर्ड अब तक कायम हैं। वर्ष 1962 में वे निर्दलीय विधायक चुने गए। यह सिलसिला वर्ष 1967 में भी चला। तब वे सोशलिस्ट पार्टी से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद वर्ष 1972 में इसी पार्टी के सिंबल पर शर्मा ने चुनाव जीता। वर्ष 1977 के चुनाव में जब जनता पार्टी आई तो इस दल से उम्मीदवार बनकर केदारनाथ फिर निर्वाचित हुए। वर्ष 1985 में जनता पार्टी और वर्ष 1990 में जनता दल से शर्मा जीतकर विधानसभा में पहुंचे।

अब तक ये बने विधायक
1952 मोतीराम- कांग्रेस
1957 देवनाथ- निर्दलीय
1962 केदारनाथ- निर्दलीय
1967 केदारनाथ- सोशलिस्ट पार्टी
1972 केदारनाथ- सोशलिस्ट पार्टी
1977 केदारनाथ- जनता पार्टी
1980 राधेश्याम- कांग्रेस
1985 केदारनाथ- जनता पार्टी
1990 केदारनाथ- जनता दल
1993 राधेश्याम- कांग्रेस
1998 राधेश्याम- कांग्रेस
2003 सुरेन्द्र सिंह राठौड़- भाजपा
2008 राधेश्याम -भाजपा
2013 कामिनी जिन्दल- जमींदारा पार्टी
2018 राजकुमार गौड़- निर्दलीय

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