
सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल थर्मल की सातवीं इकाई की सी मिल में लगी आग। फोटो पत्रिका
Sri Ganganagar : श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट 660 मेगावाट की सातवीं इकाई की कोयला मिल में रविवार सुबह ब्लास्ट होने से आग लग गई। मिली जानकारी के अनुसार रविवार सुबह 5 बजकर 30 मिनट के करीब 660 मेगावाट की सातवीं इकाई की सी कोयला मिल में ब्लास्ट होने से आग लग गई। मिल में हुए धमाके से आस-पास काम करने वाले श्रमिक व कर्मचारी सहम गए। हालांकि आग से इकाई का विद्युत उत्पादन प्रभावित नही हुआ है।
परियोजना प्रमुख पुरुषोत्तम धारीवाल ने बताया कि चूंकि कोयला पीसने के दौरान कोयला गर्म हो जाता है, ज्वलनशील प्रकृति के कारण मिल में हल्का ब्लास्ट होने से आग लग गई थी। जिसे परियोजना की दमकल ने तुरंत काबू पा लिया। पुरुषोत्तम धारीवाल ने बताया कि आग के कारण 660 मेगावाट की इकाई से बिजली उत्पादन प्रभावित नही हुआ है। आग के कारणों की जांच की जाएगी।
रविवार सुबह 9 बजे तक परियोजना की 250-250 मेगावाट की पहली, दूसरी, तीसरी व चौथी इकाई से करीब 850 मेगावाट व सुपर क्रिटिकल थर्मल की 660-660 मेगावाट की सातवीं व आठवी इकाई से 697 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा था।
विद्युत उत्पादन निगम इंटक के प्रदेश महामंत्री श्याम सुंदर शर्मा ने कोयला मिलों के आस-पास साफ-सफाई नहीं रखने व चारों तरफ कोल पाउडर बिखरे रहने से हल्की सी गर्मी व चिंगारी से आग लग जाती है, उन्होंने संबंधित ठेका फर्म पर कार्रवाई की मांग की है।
इससे पहले भी सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट आग लग चुकी है। बीते साल 30 अक्टूबर को भी सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट की आठ नंबर यूनिट के कन्वेयर बेल्ट में भीषण आग लग गई। इंटक संगठन ने फर्म पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। कन्वेयर बेल्टों के रखरखाव के लिए परियोजना ने करोड़ों रुपए के टेंडर किए थे। आग इतनी भीषण थी कि दो घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद रात साढ़े आठ बजे हालात काबू में आए। परियोजना के अधिकारियों ने बताया कि इस कन्वेयर बेल्ट से सातवीं आठवीं सुपर क्रिटिकल यूनिट को कोल आपूर्ति की जाती है।
सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन राजस्थान का पहला सुपर थर्मल पावर प्लांट है। यह श्रीगंगानगर जिले में सूरतगढ़ शहर से लगभग 27 किमी दूर थुकराना गांव के निकट स्थित है। राजस्थान राज्या विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) द्वारा संचालित यह कोयला आधारित प्लांट कुल 2820 MW (6×250 MW + 2×660 MW) क्षमता का है। 1998 में शुरू हुए इस प्लांट ने राजस्थान की विद्युत उत्पादन क्षमता को काफी बढ़ाया है। इंदिरा गांधी नहर से पानी की आपूर्ति और रेलमार्ग से कोयला लाने की सुविधा के कारण इस स्थान का चयन किया गया।
Updated on:
19 Apr 2026, 1:23 PM IST
Published on:
19 Apr 2026, 1:23 PM IST
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