
श्रीगंगानगर.
नौ साल के बालक को लंगर खिलाने के बहाने सूने इलाके में ले जाकर वहां अप्राकृतिक मैथुन करने और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल करने के जुर्म में अदालत ने चार जनों को दस दस साल कठोर कारावास और पांच पांच हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है। यह निर्णय मंगलवार को लैगिंग अपराधों से बालकों का सरंक्षण प्रकरण एवं अनूसचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण प्रकरण की विशेष न्यायाधीश संदीपकौर ने सुनाया।
विशिष्ट लोक अभियोजक बनवारीलाल कड़ेला ने बताया कि केसरीसिंहपुर थाने में पीडि़ता के पिता की ओर से 14 जून 2016 को मामला दर्ज किया गया था। इसमें बताया गया था कि करीब डेढ़ महीने पहले उसके नौ वर्षीय बेटे को एक गांव में लंगर खिलाने के बहाने केसरीसिंहपुर क्षेत्र गांव साधावाली काट निवासी भंवरलाल (27) पुत्र मोहनलाल, 19 वर्षीय करणी पुत्र भंवरलाल नायक, 19 वर्षीय रवि पुत्र दुलीचंद नायक, 20 वर्षीय सोनू उर्फ जगदीश पुत्र हंसराज नायक और एक बाल अपचारी अपने साथ ले गए। रास्ते में सूनी जगह पर इन पांचों ने बालक के साथ अप्राकृतिक मैथुन किया और उसका वीडियो बना लिया।
इस वीडियो को वट्सअप और फेसबुक पर अपलोड कर दिया। बालक को इन लोगों ने धमकी दी कि अगर यह बात बताई तो उसकी बहन के साथ घटना कारित कर देंगे। इस बीच सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटनाक्रम की जानकारी मिली तो उसने पीडि़त बेटे से यह बात पूछी तो उसने सारे घटनाक्रम से अवगत कराया। पुलिस ने इन चारों को अगले दिन 15 जून 2016 को गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा एक बाल अपचारी के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड में पेश किया, वहां से उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया।
अदालत ने चारों आरोपितों को पोस्को एक्ट के तहत दोषी मानते हुए दस दस साल कारावास व पांच पांच हजार रुपए की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से वकील राजकुमार नागपाल ने भी पैरवी की। जिन चारों आरोपितों को दोषी माना गया है, वे गिरफ्तारी से लेकर अब तक न्यायिक अभिरक्षा में हैं।
Updated on:
21 Feb 2018, 8:04 AM IST
Published on:
21 Feb 2018, 6:56 AM IST
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