समाज के लोग इन्हें एक मसीहा की तरह मानते है। समाज के लोगों ने बताया कि उनका संपूर्ण जीवन ही नेकी, भलाई, अमन और सच्चाई की मिसाल है, लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी के आखिरी हज में जो बातें कहीं वे हर इंसान के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। जुलूस के पूर्व बड़ी संख्या में लोग जामा मस्जिद के बाहर एकत्रित हुए। मोहम्मद पैगम्बर के जन्मदिन को मनाने तथा जुलूस को लेकर पिछले कई दिनों से समाज के लोग व्यवस्थाएं बनाने में लगे हुए थे। इस जुलूस में मोहम्मद रफीक असलम खान नियामत अली रसूल खान राजा खान मंजीर खान अल्लाह रक्खा फारूख आमीन हाकम सोकत अली सलीम इमरान लाल मोहम्मद सहित अन्य लोगों ने भाग लिया।