
Villagers protest
जरही. भटगांव एसईसीएल क्षेत्र के ग्राम बंशीपुर के ग्रामीणों ने गुरूवार को नौकरी व मुआवजे की मांग को लेकर जरही के महाप्रबंधक कार्यालय में मुख्य महाप्रबंधक के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें भूमि अधिग्रहण के बदले नौकरी एवं मुआवजा देने की मांग प्रबंधन से की गई है। ज्ञात हो कि विगत 25-30 वर्षं से ग्राम पंचायत बंशीपुर में एसईसीएल द्वारा दो खदानों का संचालन किया जा रहा है जिसमें वर्तमान स्थिति में एक खदान कल्याणी बंद तथा एक खदान शिवानी चालू है।
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बंशीपुर में ग्रामीणों को एसईसीएल भटगांव क्षेत्र के कल्याणी भूमिगत खदान एवं शिवानी भूमिगत खदान में अधिग्रहित भूमि ग्राम के बदले नौकरी एवं मुआवजा देने के संबंध में विगत 5 वर्षों से एसईसीएल द्वारा मकान, बाड़ी व पेड़-पौधे का सर्वे पूर्ण करने के बाद भी गुमराह किया जा रहा है।
कई बार ग्राम सभा एवं बैठक में मुख्य महाप्रबंधक द्वारा आश्वासन भी दिया गया कि शीघ्र ही नौकरी और मुआवजा ग्रामवासियों को दिया जाएगा लेकिन आज तक गांव के किसी भी प्रभावित को नौकरी एवं मुआवजा नहीं दिया गया है। ग्रामीणों द्वारा एसईसीएल कार्यालय में पूछे जाने पर अधिकारी द्वारा कार्रवाई जारी है, यह कहकर भोले-भाले ग्रामीणों को वापस घर भेज दिया जाता है।
विगत 5 महीने पूर्व भी बंशीपुर के ग्रामीणों द्वारा शिवानी खदान के मुख्य गेट को बंद कर आंदोलन किया था, जिसके पश्चात शासन प्रशासन के अधिकारियों एवं एसईसीएल प्रबंधन द्वारा चार महीने के अंदर नौकरी एवं मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया था। साथ ही ग्रामवासियों को मूलभूत सुविधाओं के समस्याओं के निराकरण हेतु भी आश्वासन दिया गया था परंतु आज तक इस विषय पर प्रबंधन द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
इन समस्याओं को लेकर गुरूवार को ग्रामवासियों का गुस्सा प्रबंधन पर फूट पड़ा और उन्होंने एसईसीएल महाप्रबंधक कार्यालय के सामने खड़े होकर प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारे लगाए। इसके बाद ज्ञापन देखकर 2 अगस्त को शिवानी खदान के सामने टेंट लगाकर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी प्रबंधन को दी। इस दौरान पूर्व सरपंच राजाराम, बिंदेश्वर, ओमप्रकाश, रामेश्वर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
प्रभावित ग्राम में ये भी समस्या
बंशीपुर ग्राम में सक्षम अधिकारियों द्वारा भूजल स्तर का सर्वे किया गया और साफ कह दिया गया कि भूमिगत खदान होने की वजह से जल संग्रहण करना असंभव है।
इसकी वजह से ग्राम में सभी कुएं, डबरी, पोखर, नलकूप आदि कई वर्षों से सूखे पड़े हैं। पानी की कमी के कारण कृषि योग्य भूमि भी बंजर हो गई है तथा मवेशियों को नहाने के लिए पूरे गांव में कोई व्यवस्था नहीं है। असुविधाओं की वजह से गांव के कई लोग घर छोड़कर अन्यत्र कहीं मजदूरी करने को विवश हैं।
Published on:
27 Jul 2018 04:28 pm
